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Ambedkar Nagar News: फिटनेस जांच के नियमों में बदलाव से बढ़ीं मुश्किलें
Fri, 16 Jan 2026 01:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Fri, 16 Jan 2026 01:15 AM IST
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अंबेडकरनगर। व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस को लेकर लागू किए गए नए नियमों ने वाहन स्वामियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एआरटीओ कार्यालयों में होने वाली मैनुअल फिटनेस जांच को बंद कर अब इसे निजी ऑटोमेटेड व्हीकल फिटनेस सेंटर (एटीएस) के जरिये अनिवार्य कर दिया गया है। जिले में एक भी सेंटर क्रियाशील न होने के कारण वाहन स्वामियों को वाराणसी की दौड़ लगानी पड़ेगी, जिससे मुसीबत बढ़ गई है।
नियम के मुताबिक, एटीएस से लगभग 100 किलोमीटर के क्षेत्र को जोड़ा गया है। केंद्र लखनऊ व वाराणसी में होने के चलते इन वाहन स्वामियों को फिटनेस के लिए लंबी दौड़ लगाने पड़ेगी। इससे वाहन मालिकों को न सिर्फ 100 से 150 किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ेगी, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ जाएगा। नई व्यवस्था वाहन स्वामियों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।
एक तरफ सेंटर दूर होने से समय पर फिटनेस कराना कठिन हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नियम का उल्लंघन होने पर भारी जुर्माने का डर है। फिटनेस न होने पर पहली बार पकड़े जाने पर 5000 रुपये और दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये के चालान का कड़ा प्रावधान है। नियमों में बदलाव से लागत दोगुनी हो गई है। फिटनेस के लिए वाराणसी व लखनऊ जाने का मतलब है कि कम से कम 10 हजार रुपये से अधिक का अतिरिक्त डीजल लगना। यदि जिले में ही सेंटर खुल जाए तो समस्या नहीं होगी।
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निजी आटोमेटेड फिटनेस सेंटर (एटीएस) की अनिवार्यता से वाहन मालिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसे संघ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। इसका संघ व वाहन मालिक विरोध कर रहे हैं। एटीएस लखनऊ व वाराणसी शहर में बने हैं। वहां जाने के लिए ट्रक मालिकों को 10-15 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा।
- आलोक सिंह, ट्रांसपोर्ट संघ अध्यक्ष
इस व्यवस्था से छोटे ट्रांसपोर्टरों की समस्या बढ़ गई है। मैनुअल फिटनेस में एआरटीओ कार्यालय में काम जल्दी हो जाता था। अब प्राइवेट सेंटर की फीस और वहां जाने का खर्च बजट से बाहर हो रहा है।
दिनेश जायसवाल, ट्रक मालिक
वाहनों को फिटनेस के लिए 100 किलोमीटर दूर ले जाना जोखिम भरा है। हाईवे पर वाहनों को ले जाने में सुरक्षा का भी खतरा रहता है। जिले में अविलंब सेंटर बनाने की जरूरत है।
सराफत अली, ट्रक मालिक
सरकार ने हर जिले में तीन सेंटर खोलने की बात कही थी, लेकिन अभी तक एक भी धरातल पर नहीं है। प्रशासन को चाहिए था कि जब तक हमारे जिले में सेंटर चालू नहीं हो जाते, तब तक पुरानी व्यवस्था को ही लागू रखा जाता।
उमेश अग्रहरि, ट्रक मालिक
व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस निजी एटीएस लखनऊ व वाराणसी से कराने के निर्देश शासन से प्राप्त हुए हैं। आदेश के क्रम में मांगी गई रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है। अग्रिम आदेश मिलते ही अनुपालन कराया जाएगा। वर्तमान में कार्यालय से ही फिटनेस कराया जा रहा है।
सतेंद्र कुमार यादव, एआरटीओ
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नियम के मुताबिक, एटीएस से लगभग 100 किलोमीटर के क्षेत्र को जोड़ा गया है। केंद्र लखनऊ व वाराणसी में होने के चलते इन वाहन स्वामियों को फिटनेस के लिए लंबी दौड़ लगाने पड़ेगी। इससे वाहन मालिकों को न सिर्फ 100 से 150 किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ेगी, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ जाएगा। नई व्यवस्था वाहन स्वामियों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।
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एक तरफ सेंटर दूर होने से समय पर फिटनेस कराना कठिन हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ नियम का उल्लंघन होने पर भारी जुर्माने का डर है। फिटनेस न होने पर पहली बार पकड़े जाने पर 5000 रुपये और दूसरी बार पकड़े जाने पर 10 हजार रुपये के चालान का कड़ा प्रावधान है। नियमों में बदलाव से लागत दोगुनी हो गई है। फिटनेस के लिए वाराणसी व लखनऊ जाने का मतलब है कि कम से कम 10 हजार रुपये से अधिक का अतिरिक्त डीजल लगना। यदि जिले में ही सेंटर खुल जाए तो समस्या नहीं होगी।
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निजी आटोमेटेड फिटनेस सेंटर (एटीएस) की अनिवार्यता से वाहन मालिकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसे संघ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। इसका संघ व वाहन मालिक विरोध कर रहे हैं। एटीएस लखनऊ व वाराणसी शहर में बने हैं। वहां जाने के लिए ट्रक मालिकों को 10-15 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च आएगा।
- आलोक सिंह, ट्रांसपोर्ट संघ अध्यक्ष
इस व्यवस्था से छोटे ट्रांसपोर्टरों की समस्या बढ़ गई है। मैनुअल फिटनेस में एआरटीओ कार्यालय में काम जल्दी हो जाता था। अब प्राइवेट सेंटर की फीस और वहां जाने का खर्च बजट से बाहर हो रहा है।
दिनेश जायसवाल, ट्रक मालिक
वाहनों को फिटनेस के लिए 100 किलोमीटर दूर ले जाना जोखिम भरा है। हाईवे पर वाहनों को ले जाने में सुरक्षा का भी खतरा रहता है। जिले में अविलंब सेंटर बनाने की जरूरत है।
सराफत अली, ट्रक मालिक
सरकार ने हर जिले में तीन सेंटर खोलने की बात कही थी, लेकिन अभी तक एक भी धरातल पर नहीं है। प्रशासन को चाहिए था कि जब तक हमारे जिले में सेंटर चालू नहीं हो जाते, तब तक पुरानी व्यवस्था को ही लागू रखा जाता।
उमेश अग्रहरि, ट्रक मालिक
व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस निजी एटीएस लखनऊ व वाराणसी से कराने के निर्देश शासन से प्राप्त हुए हैं। आदेश के क्रम में मांगी गई रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है। अग्रिम आदेश मिलते ही अनुपालन कराया जाएगा। वर्तमान में कार्यालय से ही फिटनेस कराया जा रहा है।
सतेंद्र कुमार यादव, एआरटीओ