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धान बेचने को भटक रहे 50 हजार किसान
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Sat, 03 Dec 2016 11:27 PM IST
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अंबेडकरनगर के सिझौलिया में नोटबंदी के चलते नहीं बिक पा रहा किसानों का धान।
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी का तगड़ा असर धान बेल्ट के रूप में प्रसिद्ध जिले के लगभग 50 हजार किसानों पर सीधे पड़ा है। दरअसल धान की फसल कटाई व मड़ाई के बाद किसानों के घरों में पहुंच गयी है लेकिन उसकी बिक्री का इंतजाम करने के लिए हजारों किसानों को प्रतिदिन सरकारी केंद्रों से लेकर आढ़तियों तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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71 सरकारी केंद्रों पर एक माह से भी अधिक समय में सिर्फ 307 किसानों का ही धान खरीदा जा सका है। आढ़तियों के पास अभी नये बड़े नोट या फिर फुटकर नोट का प्रबंध न हो पाने से वे नकद भुगतान पर खरीद को तैयार नहीं हो रहे हैं। ऐसे में जिले के ज्यादातर किसान धान बेचने को लेकर परेशान हैं।
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पुराने बड़े नोटों पर बैन ने यूं तो किसानों के लिए खाद व बीज के प्रबंध में मुश्किलें खड़ी ही की थीं, अब उससे ज्यादा बड़ी मुश्किल तैयार हो चुकी धान की फसल की बिक्री को लेकर है। गौरतलब है यह जनपद प्रदेश के धान बेल्ट के तौर पर प्रसिद्ध है। राइस मिलों की लंबी शृंखला इसीलिए जिले में मौजूद है। गत सत्र में जिले के लगभग एक लाख 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की गयी थी।
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लगभग 50 हजार किसानों ने धान की खेती की थी। अब धान की फसल कटाई व मड़ाई के बाद किसानों के घर में पहुंच चुकी है लेकिन उसकी बिक्री का कोई पुरसाहाल नहीं है। किसान आमतौर पर धान फसल की बिक्री कर रवी फसल की तैयारी करते हैं। इसके साथ ही उन्हें कई प्रकार की निजी जरूरतों के लिए भी पर्याप्त रकम मिल जाती है।
हालांकि नोट बंदी ने किसानों की इन सभी तैयारी व उम्मीदों पर जबरदस्त प्रहार किया है। किसानों का धान अधिक मूल्य पर खरीदा जा सके इसके लिए शासन ने जिले में कुल 71 धान क्रय केंद्र 1 नवंबर से खोल रखा है। 74 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य भी जिले में है लेकिन एक माह से अधिक बीत जाने के बाद भी सिर्फ 307 किसानों का ही लगभग पौने दो हजार मीट्रिक टन धान खरीदा जा सका है।
सरकारी एजेंसियों पर धान बिक्री न हो पाने के चलते आमतौर पर किसान निजी आढ़तों का सहारा लेते हैं। इसमें उन्हें बिक्री में आसानी के साथ ही नकद भुगतान भी मिल जाया करता था। इस बार अब आढ़तों से भी किसानों को आमतौर पर निराशा ही हाथ लग रही है। कारण यह कि आढ़तियों के पास भी कैश का अभाव है। सप्ताह में उन्हें सिर्फ 24 हजार ही मिल पा रहा है।
आढ़ती सुरेंद्र ने बताया कि ऐसे में वे धान देने के बदले किसानों को कैसे कर पायें, यह एक चुनौती बना हुआ है। एक अन्य आढ़ती दिवाकर ने कहा कि वे उधार धान खरीदने को तैयार हैं लेकिन इस पर किसान तैयार नहीं। किसान अपनी तैयार धान की फसल को लेकर कहां जाएं, यह एक बड़ा संकट बना है।
अकबरपुर तहसील अंतर्गत सिझौलिया निवासी कृष्ण कुमार ने बताया कि लगभग 25 क्विंटल धान की मड़ाई के बाद उनके घर पहुंच चुकी है। वे इसकी बिक्री करना चाहते हैं लेकिन न तो सरकारी केंद्र पर धान बिक पा रहा है और न ही आढ़तियों द्वारा नकद भुगतान कर खरीदा जा रहा है, ऐसे में कई जरूरी काम के लिए जिस रकम की जरूरत थी वह नहीं मिल पा रही है।
ऐनवां निवासी इंद्रेश वर्मा ने बताया कि लगभग 18 क्विंटल धान अपने घर पहुंचा चुके हैं। पहले खेत से ही आढ़तिये धान उठा ले जाते थे लेकिन इस वर्ष कई आढ़तियों से संपर्क करने के बाद भी वे सब नकद भुगतान पर धान खरीदने को तैयार नहीं हैं।
जलालपुर के किसान रामपलट ने कहा कि लगभग दस क्विंटल धान की बिक्री को लेकर वे भी चिंतित हैं। आढ़तिये उधार धान लेने को तो तैयार हैं लेकिन नकद भुगतान के लिए भी तैयार नहीं। भीटी के किसान शंकर ने बताया कि 12 क्विंटल धान की पैदावार उनके खेतों से हुई है।
इसकी बिक्री नहीं हो पा रही है। प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी प्रदीप तिवारी ने बताया कि कतिपय एजेंसी के पास शुरू में पैसा न होने तथा बाद में बैंक गारंटी आदि को लेकर दिक्कत हुई थी। कुछ और भी कठिनाई थी। सभी समस्याएं लगभग दूर हो गयी हैं। अब धान खरीद में तेजी सुनिश्चित होगी।