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कठिन है अब अटल बिहारी जैसे व्यक्तिव का मिलना
Updated Thu, 16 Aug 2018 11:04 PM IST
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अंबेडकरनगर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का चले जाना जिले में तमाम लोगों को भावुक कर गया। इनमें से कई ऐेसे लोग भी हैं, जिन्हें अटल जी से मिलने व उनका सानिध्य प्राप्त करने का सौभाग्य मिला था। ऐसे लोग और भी भावुक दिखाई पड़े। पूर्व प्रधानमंत्री के व्यक्तिव की चर्चा करते हुए ऐसे लोगों का कहना था कि उनके जैसा व्यक्तिव इस पूरे धरती पर मिलना कठिन है। वे सभी को साथ लेकर चलने में यकीन रखते थे।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. राजितराम त्रिपाठी से उनके आवास पर मुलाकात हुई तो वे पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न पं. अटलबिहारी वाजपेयी के निधन से भावुक दिखे। वाजपेयी के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी पहली मुलाकात वर्ष 1971 में लखनऊ झंडेवाला पार्क अमीनाबाद में हुई थी। उस समय भारत-पाक युद्ध को लेकर संघ की बैठक चल रही थी। वह भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष थे। उनके ओजपूर्ण भाषण ने पहली ही बार में ही मुझे काफी प्रभावित किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि हमें आपसी राजनीतिक मतभेद भूलकर देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का साथ देना होगा। यह वक्त राजनीति करने का नहीं, बल्कि राष्ट्र रक्षा व सहयोग का है। हम सभी को पूरी मजबूती के साथ सरकार की हर संभव मदद करनी होगी। ऐसी विचारधारा रखने वाले वाजपेेयी से दूसरी मुलाकात वर्ष 1984 में फैजाबाद जिले के गुलाबबाड़ी में हुई थी। विधानसभा चुनाव का वक्त था। भावुक होते हुए बोले कि उनसे जब भी कोई मिलता था उसे एक नई जानकारी व ऊर्जा का आभास होता था।
भाजपा के पूर्व विधायक त्रिवेणीराम के मुताबिक वह अटल जी से कुल 9 बार मिले थे। पहली मुलाकात उनकी मुंबई के बांद्रा में आयोजित एक अधिवेशन में हुई थी। राजनीति करने की एक नई सीख उस दिन मिली। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा था कि राजनीति स्वार्थ की नहीं होनी चाहिए। राजनीति देश सेवा व समाज सेवा का माध्यम है। इसे अपने व्यक्तिगत हित का आधार नहीं बनाना चाहिए। कहा कि उन्हें वह दिन भी याद है जबकि वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जहांगीरगंज विधानसभा सीट से पहली बार टिकट मिला। अटल बिहारी जी फैजाबाद के गुलाबबाड़ी मैदान में आए तो उनका हाथ पकड़ा और ऊपर उठाते हुए उनके लिए वोट मांगा था। कहा कि उनका मिलनसार स्वभाव था कि हर व्यक्ति उनसे सहजता से मिल सकता था। उन्होंने हमेशा नि:स्वार्थ की राजनीति करने की सलाह दी। वह भारतीय राजनीति को एक नई उच्चतम शिखर पर पहुंचाने वाले व्यक्तित्व थे। उनकी यह कमी दूर नहीं हो सकेगी।
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भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. राजितराम त्रिपाठी से उनके आवास पर मुलाकात हुई तो वे पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न पं. अटलबिहारी वाजपेयी के निधन से भावुक दिखे। वाजपेयी के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी पहली मुलाकात वर्ष 1971 में लखनऊ झंडेवाला पार्क अमीनाबाद में हुई थी। उस समय भारत-पाक युद्ध को लेकर संघ की बैठक चल रही थी। वह भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष थे। उनके ओजपूर्ण भाषण ने पहली ही बार में ही मुझे काफी प्रभावित किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि हमें आपसी राजनीतिक मतभेद भूलकर देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का साथ देना होगा। यह वक्त राजनीति करने का नहीं, बल्कि राष्ट्र रक्षा व सहयोग का है। हम सभी को पूरी मजबूती के साथ सरकार की हर संभव मदद करनी होगी। ऐसी विचारधारा रखने वाले वाजपेेयी से दूसरी मुलाकात वर्ष 1984 में फैजाबाद जिले के गुलाबबाड़ी में हुई थी। विधानसभा चुनाव का वक्त था। भावुक होते हुए बोले कि उनसे जब भी कोई मिलता था उसे एक नई जानकारी व ऊर्जा का आभास होता था।
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भाजपा के पूर्व विधायक त्रिवेणीराम के मुताबिक वह अटल जी से कुल 9 बार मिले थे। पहली मुलाकात उनकी मुंबई के बांद्रा में आयोजित एक अधिवेशन में हुई थी। राजनीति करने की एक नई सीख उस दिन मिली। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा था कि राजनीति स्वार्थ की नहीं होनी चाहिए। राजनीति देश सेवा व समाज सेवा का माध्यम है। इसे अपने व्यक्तिगत हित का आधार नहीं बनाना चाहिए। कहा कि उन्हें वह दिन भी याद है जबकि वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जहांगीरगंज विधानसभा सीट से पहली बार टिकट मिला। अटल बिहारी जी फैजाबाद के गुलाबबाड़ी मैदान में आए तो उनका हाथ पकड़ा और ऊपर उठाते हुए उनके लिए वोट मांगा था। कहा कि उनका मिलनसार स्वभाव था कि हर व्यक्ति उनसे सहजता से मिल सकता था। उन्होंने हमेशा नि:स्वार्थ की राजनीति करने की सलाह दी। वह भारतीय राजनीति को एक नई उच्चतम शिखर पर पहुंचाने वाले व्यक्तित्व थे। उनकी यह कमी दूर नहीं हो सकेगी।
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