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आजादी मिली तो गांव में बजने लगे थे ढोल-नगाड़े

Tue, 14 Aug 2018 10:48 PM IST
Updated Tue, 14 Aug 2018 10:48 PM IST
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आजादी मिली तो गांव में बजने लगे थे ढोल-नगाड़े
अंबेडकरनगर। लगभग सात दशक पहले देश को मिली आजादी की याद करते हुए आज भी लोगों की आंखें खुशी से चमक उठती हैं। अमर उजाला ने 15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता के मौके को याद करने के लिए कई लोगों से बात की, तो ऐसा लगा कि वे सब उसी दौर में फिर से पहुंच गए हों।
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चेहरे पर मुस्कान बिखेरते हुए किसी ने बताया कि आजादी की जानकारी मिलते ही गांव में ढोल नगाड़े बजने लगे, तो कहीं पर आजादी की खुशी में पकवान बने। स्थायी घर बनाने में मिलने वाली छूट तथा मालगुजारी बंद होने से मिली राहत को भी लोगों ने याद किया। बुजुर्गों का कहना था कि जिस कठिनाई से देश को आजादी मिली है, उसे बनाए रखने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी।
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अकबरपुर तहसील क्षेत्र के कटरिया सम्मनपुर निवासी 90 वर्षीय रामबहाल वर्मा अतीत में जाते हुए कहते हैं कि उस समय न तो रेडियो था और न ही बिजली। 15 अगस्त 1947 से पहले कई बार जानकारी हुई कि देश आजाद हो हो रहा है। 15 अगस्त के कई दिनों बाद गांधी जी का झंडा लहराते हुए दूसरे क्षेत्र के लोग उनके गांव पहुंचे। इससे जानकारी हुई कि देश को पूरी तरह आजादी मिल गई है। इ
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स बीच रियासत की ओर से मालगुजारी लेनी भी बंद कर दी गई। देश की आजादी की जानकारी होने पर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों को यकीन हो गया कि वास्तव में देश आजाद हो गया है। उस दिन गांव के लगभग सभी घरों में अच्छे पकवान बने। कहा कि आजादी से पहले स्थायी घर नहीं बना सकते थे, लेकिन आजादी मिलने के बाद स्थायी घर बनाने की छूट ने लोगों की खुशियां बढ़ा दीं। रामबहाल ने कहा कि आजादी की महत्ता बनाए रखने के लिए हमें अपने आदर्शों को सदैव याद करते रहना होगा।

भीटी तहसील क्षेत्र के टेमा गांव निवासी रामअवध तिवारी (95) से जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने देश की आजादी के बारे में जानकारी हासिल की, तो उनकी आंखें खुशी से चमक उठीं।

उन्होंने कहा कि उनके पिता जगमोहन जमींदार थे। 15 अगस्त 1947 के दिन को याद करते हुए रामअवध ने कहा कि उनके पिता व गांव के अन्य लोग ढोल नगाड़ों के बीच जश्न बना रहे थे। उस समय वे किशोर अवस्था में थे। उन्होंने अपने पिता से जश्न का कारण पूछा, तो बताया कि देश गुलामी की जंजीरों से मुक्त हो चुका है।


अंग्रेज देश छोड़कर चले गए है। अब हम सभी आजाद हैं। किसी के गुलाम नहीं हैं। इसके बाद में हम भी अपने मित्रों के साथ जश्न में शामिल हो गए। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले रामअवध ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि जिस कठिनाई से हमें आजादी मिली है, उसे बनाए रखने के लिए हमें अपनी-अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह से निर्वहन करना होगा। लोगों को सब कुछ सरकारों पर छोड़ देने की आदत से बचने की जरूरत है।
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