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खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कराया महादेवा घाट पर बैरीकेडिंग
Updated Fri, 10 Aug 2018 10:49 PM IST
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टांडा/राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। उफनाई सरयू नदी के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन ने महादेवा घाट पर सघन बैरीकेडिंग करा दी है। ऐसा इसलिए, जिससे किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। नदी का पानी इस बीच मामूली रूप से कम हुआ है, लेकिन अभी भी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर बह रहा है। माझा उलटहवा के जिन दो पुरवों में गुरुवार को बाढ़ का पानी पहुंच गया था, वहां अभी भी पानी भरा है व 12 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र में लगभग पांच सौ बीघा फसल व चारागाह जलमग्न हो गए हैं। इसके चलते मवेशियों के चारे का संकट अभी भी बना हुआ है।
शुक्रवार को सरयू नदी के जलस्तर में मामूली कमी तो आई है, लेकिन वह अभी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को उफनाई सरयू के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई थी। खतरे के निशान 92.73 मीटर से 58 सेमी ऊपर जलस्तर बढ़ गया था। नतीजा यह रहा कि बाढ़ का पानी जहां माझा उलटहवा के दो पुरवों दिलशेर का पूरा व बाबूराम का पूरा में पहुंच गया, वहीं माझा करमपुर बरसावां, अवसानपुर, सालारपुर, नैपुरा, महरीपुर, आसोपुर, छज्जापुर, डुहिया, इस्माइलपुर बेलदहा, फूलपुर, केवटला, पलटू पीर, माझा कम्हरिया समेत एक दर्जन से अधिक गांव के अत्यंत निकट पानी पहुंच गया था। इसके चलते एक तरफ जहां प्रशासन ने सभी नौ बाढ़ चौकियों को अलर्ट करते हुए उन पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी थी, वहीं बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अतिरिक्त नावों की व्यवस्था कर दी थी। माझा उलटहवा के ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए निजी तौर पर नाव की व्यवस्था कर ली थी।
इस बीच नदी के पानी के खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच जाने के चलते प्रशासन ने महादेवा घाट पर बैरीकेडिंग करा दी है। एसडीएम पंकज सिंह ने एक दिन पहले सीओ वीके श्रीवास्तव के साथ संबंधित क्षेत्र का जायजा लिया था। कोई जन हानि न होने पाए, इसके लिए बैरीकेडिंग का निर्देश दिया था। इस क्रम में महादेवा घाट पर बैरीकेडिंग का कार्य पूरा कर लिया गया। टांडा नगर के छज्जापुर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियां भी पानी से जलमग्न होने के कारण प्रशासन वहां आवश्यक एहतियात बरत रहा है। एसडीएम पंकज सिंह ने शुक्रवार को बताया कि पानी में कमी आई है, लेकिन पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
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शुक्रवार भोर से दर्ज हुई कमीं
शुक्रवार भोर से जलस्तर में कमीं होना शुरू हो गया। अपराह्न दो बजे तक जलस्तर में 8 सेमी की कमी आई। अपराह्न 3 बजे के बाद से जलस्तर खतरे के लाल निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया। इसके बाद से पानी इसी पर स्थिर बना हुआ है। जलस्तर के स्थिर होने के बवजूद निकटवर्ती गावों के ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है। माझा उलटहवा के दोनों पुरवों दिलशेर का पूरा व बाबूराम का पूरा से पानी अभी हटा नहीं है। जलस्तर बढ़ने के चलते टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के लगभग 500 बीघा खेत व चारागाह पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। इसके चलते संबंधित क्षेत्रों में मवेशियों के लिए चारे का संकट गहरा गया है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को पशुओं के चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहिए।
जलस्तर में हो रही कमी
सरयू के जलस्तर में कमी दर्ज हो रही है। इसके बावजूद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जहां कहीं भी किसी प्रकार की जरूरत महसूस हुई, प्रशासन वह सहायता उपलब्ध कराएगा। -सुरेश कुमार, डीएम
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शुक्रवार को सरयू नदी के जलस्तर में मामूली कमी तो आई है, लेकिन वह अभी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बना हुआ है। गुरुवार को उफनाई सरयू के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई थी। खतरे के निशान 92.73 मीटर से 58 सेमी ऊपर जलस्तर बढ़ गया था। नतीजा यह रहा कि बाढ़ का पानी जहां माझा उलटहवा के दो पुरवों दिलशेर का पूरा व बाबूराम का पूरा में पहुंच गया, वहीं माझा करमपुर बरसावां, अवसानपुर, सालारपुर, नैपुरा, महरीपुर, आसोपुर, छज्जापुर, डुहिया, इस्माइलपुर बेलदहा, फूलपुर, केवटला, पलटू पीर, माझा कम्हरिया समेत एक दर्जन से अधिक गांव के अत्यंत निकट पानी पहुंच गया था। इसके चलते एक तरफ जहां प्रशासन ने सभी नौ बाढ़ चौकियों को अलर्ट करते हुए उन पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी थी, वहीं बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अतिरिक्त नावों की व्यवस्था कर दी थी। माझा उलटहवा के ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए निजी तौर पर नाव की व्यवस्था कर ली थी।
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इस बीच नदी के पानी के खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच जाने के चलते प्रशासन ने महादेवा घाट पर बैरीकेडिंग करा दी है। एसडीएम पंकज सिंह ने एक दिन पहले सीओ वीके श्रीवास्तव के साथ संबंधित क्षेत्र का जायजा लिया था। कोई जन हानि न होने पाए, इसके लिए बैरीकेडिंग का निर्देश दिया था। इस क्रम में महादेवा घाट पर बैरीकेडिंग का कार्य पूरा कर लिया गया। टांडा नगर के छज्जापुर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियां भी पानी से जलमग्न होने के कारण प्रशासन वहां आवश्यक एहतियात बरत रहा है। एसडीएम पंकज सिंह ने शुक्रवार को बताया कि पानी में कमी आई है, लेकिन पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
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शुक्रवार भोर से दर्ज हुई कमीं
शुक्रवार भोर से जलस्तर में कमीं होना शुरू हो गया। अपराह्न दो बजे तक जलस्तर में 8 सेमी की कमी आई। अपराह्न 3 बजे के बाद से जलस्तर खतरे के लाल निशान से 50 सेमी ऊपर पहुंचकर स्थिर हो गया। इसके बाद से पानी इसी पर स्थिर बना हुआ है। जलस्तर के स्थिर होने के बवजूद निकटवर्ती गावों के ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है। माझा उलटहवा के दोनों पुरवों दिलशेर का पूरा व बाबूराम का पूरा से पानी अभी हटा नहीं है। जलस्तर बढ़ने के चलते टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्र के लगभग 500 बीघा खेत व चारागाह पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। इसके चलते संबंधित क्षेत्रों में मवेशियों के लिए चारे का संकट गहरा गया है। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को पशुओं के चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहिए।
जलस्तर में हो रही कमी
सरयू के जलस्तर में कमी दर्ज हो रही है। इसके बावजूद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जहां कहीं भी किसी प्रकार की जरूरत महसूस हुई, प्रशासन वह सहायता उपलब्ध कराएगा। -सुरेश कुमार, डीएम