फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े चिकित्सकों के पद, कैसे हो इलाज

सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े चिकित्सकों के पद, कैसे हो इलाज

Fri, 13 Jul 2018 11:16 PM IST
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े चिकित्सकों के पद, कैसे हो इलाज
अंबेडकरनगर। तमाम उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के हाथ आम तौर पर निराशा ही लग रही है। सबसे ज्यादा समस्या चिकित्सकों को लेकर है। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 11 पद खाली पड़े हैं। तो वहीं सीएचसी, पीएचसी व अतिरिक्त केंद्रों में कुल 52 चिकित्सक नही हैं। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों व उनके तीमारदारों को किन मुश्किल परिस्थितियों से जिले में जूझना पड़ रहा है।
विज्ञापन

लोगों का स्वास्थ्य बेहतर रखने के उद्देश्य से स्थापित सरकारी अस्पताल आम लोगों की उम्मीदों पर खरे नही उतर पा रहे हैं। महत्वपूर्ण जांचों व गंभीर किस्म के इलाज की बात छोड़ दी जाए तो चिकित्सकों से समुचित परामर्श मिल पाना ही कठिन बना हुआ है। दरअसल इन अस्पतालों में पदों के सापेक्ष पर्याप्त चिकित्सक ही नही हैं। उम्मीदों के सबसे बड़े केंद्र जिला अस्पताल में ही मरीजों की उम्मीदें तार तार हो रही हैं। यहां चिकित्सकों के कुल 33 पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ 22 पद पर है। हालात इस कदर खराब हैं कि इमरजेंसी सेवा के लिए आकस्मिक चिकित्सकों की अलग से तैनाती नही है। कायदे से इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए अलग से ईएमओ की तैनाती होती है, लेकिन यहां सामान्य चिकित्सकों से ही यह ड्यूटी भी ली जाती है। इसका असर भी जिला अस्पताल की ओपीडी पर पड़ता है। रात में इमरजेंसी की ड्यूटी करने वाला चिकित्सक सुबह ड्यूटी पर नही आता। नतीजा यह होता है कि पहले से चिकित्सकों कमी से जूझ रहे जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों की मुश्किल और बढ़ जाती है। यह हाल तब है जब यहां औसतन प्रतिदिन 800 से अधिक मरीज अलग अलग लोगों का इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं।
विज्ञापन

जिले में स्थापित 8 सीएचसी, 2 पीएचसी व 28 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र को मिलाकर चिकित्सकों के कुल 122 पद स्वीकृत हैं, लेकिन तैनाती सिर्फ 70 पर है। चिकित्सकों के 52 पद खाली चल रहे हैं। इसी का नतीजा होता है कि कभी इमरजेंसी ड्यूटी तो कभी अवकाश पर चिकित्सकों के जाने के दौरान कई जगहों पर मरीजों का देखने का काम फार्मासिस्टों को संभालना पड़ता है। इसी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर मरीज झोला छाप चिकित्सकों के पास जाने को विवश होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


संसाधन की बजाए चिकित्सकों पर हो फोकस
जलालपुर सीएचसी पर मिले मरीज श्यामलाल ने कहा कि सरकार को अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। आलापुर में मिले बीएससी के छात्र धर्मेन्द्र ने कहा कि सरकार को यह प्रतिबंध लगाना चाहिए कि डिग्री हासिल करने के 15 वर्ष बाद तक चिकित्सकों को सरकारी सेवा में अनिवार्य रूप से बने रहना होगा। टांडा के शहंशाह ने कहा कि सरकार सिर्फ चिकित्सकों की संख्या ही बढ़ा दे तो बेहतर परामर्श से कई तरह की बीमारियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।


चल रहे जरूरी प्रयास
अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के लिए जरूरी प्रयास चल रहे हैं। शासन भी इस दिशा में गंभीर है। जो भी चिकित्सक उपलब्ध हैं उनसे मरीजों का बेहतर उपचार कराया जा रहा है।
-सालिकराम, प्रभारी सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed