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Ambedkar Nagar News: जान जोखिम में डालकर रोज रेलवे ट्रैक पार करते 10 हजार लोग
Mon, 25 Aug 2025 11:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 25 Aug 2025 11:32 PM IST
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ट्रैक पार करतीं महिलाएं।
कटेहरी (अंबेडकरनगर)। ब्लॉक के लोकापुर क्षेत्र स्थित रामदास पट्टी रेलवे अंडरपास में जलभराव ने हजारों ग्रामीणों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। अंडरपास जलमग्न होने के कारण आसपास के चार गांव लोकापुर, गौरा वसंतपुर, चांदपुर महमूदपुर और संग्रामपुर के लोग अब रोजाना रेलवे ट्रैक से गुजरने को मजबूर हैं। दस हजार की आबादी के लिए यह ट्रैक ही अब एकमात्र रास्ता बन गया है, जो सीधे मौत की ओर जाता प्रतीत होता है। ऐसे में लोगों को जान बचाने के लिए रोज परीक्षा देनी पड़ रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक अंडरपास के जलभराव से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए हर दिन रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जहां अक्सर ट्रेनों की धीमी रफ्तार और कम आवाज के कारण कोई पूर्व सूचना नहीं मिलती। हादसे की आशंका हर कदम पर बनी रहती है।
12
हर सुबह लगता है जैसे बच्चे को खतरे में भेज रहें
गांव के अभिभावक सूरज सिंह बताते हैं, जब दोनों तरफ से एकसाथ ट्रेनें आ जाती हैं, तब बच्चों का ट्रैक पार करना नामुमकिन हो जाता है। हम उन्हें अकेले स्कूल भेजने से डरते हैं, लेकिन दूसरा विकल्प नहीं है। वहीं विशाल सिंह कहते हैं कि बच्चों को हर दिन रेलवे ट्रैक पर चलना पड़ता है। कई बार ट्रेन बिल्कुल पास आ जाती है और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिलता।
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न कोई वैकल्पिक मार्ग, न राहत की पहल
ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बारिश के मौसम में यही हाल होता है, लेकिन न तो रेलवे विभाग सुध लेता है और न ही स्थानीय प्रशासन ने कभी निरीक्षण की जहमत उठाई। अंडरपास के जलभराव के चलते लोगों को बाजार, अस्पताल और स्कूल तक पहुंचने के लिए 6 से 8 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।
शीघ्र व्यवस्था कराई जाएगी
मामला संज्ञान में है और शीघ्र कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
—हौंसिला प्रसाद, खंड विकास अधिकारी
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ग्रामीणों के मुताबिक अंडरपास के जलभराव से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए हर दिन रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है, जहां अक्सर ट्रेनों की धीमी रफ्तार और कम आवाज के कारण कोई पूर्व सूचना नहीं मिलती। हादसे की आशंका हर कदम पर बनी रहती है।
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हर सुबह लगता है जैसे बच्चे को खतरे में भेज रहें
गांव के अभिभावक सूरज सिंह बताते हैं, जब दोनों तरफ से एकसाथ ट्रेनें आ जाती हैं, तब बच्चों का ट्रैक पार करना नामुमकिन हो जाता है। हम उन्हें अकेले स्कूल भेजने से डरते हैं, लेकिन दूसरा विकल्प नहीं है। वहीं विशाल सिंह कहते हैं कि बच्चों को हर दिन रेलवे ट्रैक पर चलना पड़ता है। कई बार ट्रेन बिल्कुल पास आ जाती है और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिलता।
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न कोई वैकल्पिक मार्ग, न राहत की पहल
ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बारिश के मौसम में यही हाल होता है, लेकिन न तो रेलवे विभाग सुध लेता है और न ही स्थानीय प्रशासन ने कभी निरीक्षण की जहमत उठाई। अंडरपास के जलभराव के चलते लोगों को बाजार, अस्पताल और स्कूल तक पहुंचने के लिए 6 से 8 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।
शीघ्र व्यवस्था कराई जाएगी
मामला संज्ञान में है और शीघ्र कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
—हौंसिला प्रसाद, खंड विकास अधिकारी