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वाराणसी सिकरौरा कांड: याची की दलील- माफिया बृजेश सिंह को बरी करना सही नहीं, आज भी जारी रहेगी सुनवाई

Tue, 31 Oct 2023 11:42 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 31 Oct 2023 11:42 AM IST
सार

ट्रायल कोर्ट ने उसके द्वारा दिए गए बयान पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया। नहीं तो माफिया बृजेश सिंह सहित अन्य आरोपी बरी न हो पाते। अधिवक्ता ने कहा कि याची गांव की अनपढ़ महिला है। उसके बयान का सही आकलन नहीं किया गया। उसके बयान में घटना के संबंध में किया गया कथन कोई संदेह पैदा नहीं कर रहा है।

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Varanasi Sikraura case: Petitioner's argument - acquitting mafia Brijesh Singh is not right
माफिया बृजेश सिंह। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी के बुलवा थानांतर्गत (वर्तमान में चंदौली जिला) 36 साल पहले हुए सिकरौरा कांड मामले में सुनवाई जारी है। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि मामले में माफिया बृजेश सिंह को बरी किया जाना सही नहीं था। कोर्ट ने सोमवार को समयाभाव की वजह से सुनवाई को मंगलवार तक के लिए टाल दी।

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हीरावती की ओर से दाखिल अपील पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही याची अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने केस के मुख्य गवाह हीरावती द्वारा ट्रायल कोर्ट में दिए गए बयान को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। अधिवक्ता ने बताया कि मुख्य गवाह/याची घटना में शामिल सभी आरोपियों को पहचानती है।

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आज भी जारी रहेगी सुनवाई
ट्रायल कोर्ट ने उसके द्वारा दिए गए बयान पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया। नहीं तो माफिया बृजेश सिहं सहित अन्य आरोपी बरी न हो पाते। अधिवक्ता ने कहा कि याची गांव की अनपढ़ महिला है। उसके बयान का सही आकलन नहीं किया गया। उसके बयान में घटना के संबंध में किया गया कथन कोई संदेह पैदा नहीं कर रहा है। घटना के संबंध में सीधे सबूत हैं। फिलहाल कोर्ट ने समय की कमी की वजह से केस की सुनवाई को एक दिन के लिए टालते हुए इस पर मंगलवार को सुनवाई जारी रखने को कहा है।

छह लोगों की कर दी गई थी हत्या
बता दें कि सन 1987 में तत्कालीन जिला क्षेत्र वाराणसी के बलुआ थानांतर्गत सिकरौरा कांड में याची हीरावती के पति, दो देवर और तीन पुत्रों की हत्या कर दी गई थी। इसमें माफिया बृजेश सिंह सहित कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। वाराणसी के सत्र न्यायालय ने आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद हीरावती ने सत्र न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर चुनौती दी है। कोर्ट उसी पर सुनवाई कर रही है।

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