हाईकोर्ट : कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी समेत तीन को हाईकोर्ट से मिली जमानत, सह अभियुक्तों को भी राहत
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बहुचर्चित हरेंद्र नागर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सुंदर भाटी समेत 11 दोषियों की नौ अपीलाें पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के सपा नेता व प्रधान हरेंद्र नागर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहेे कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी, उसके साथी ऋषिपाल और सिंहराज की जमानत मंजूर कर ली है। उन्हें एक करोड़ के दो जमानतगीर देने होंगे। जमानत पर छूटने के बाद भारत के बाहर बिना अदालत की अनुमति के नहीं जा सकेंगे। उन्हें अपना पासपोर्ट नोएडा पुलिस आयुक्त के कार्यालय में जमा कराना होगा।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने बहुचर्चित हरेंद्र नागर हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सुंदर भाटी समेत 11 दोषियों की नौ अपीलाें पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने कुख्यात सुंदर भाटी, ऋषिपाल और सिंहराज को जमानत देने के साथ ही सह-अभियुक्त योगेश, विकास पंडित, सोनू, बॉबी उर्फ शेर सिंह और, अनूप भाटी, दिनेश भाटी और यतींद्र चौधरी की अपीलों को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि अगले दो वर्षो में अगर अपीलों का निस्तारण नहीं होता है तो सह-अभियुक्तों को अर्जी दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी। मामला गौतमबुद्ध नगर का है। दादूपुर गांव के सपा नेता व प्रधान हरेंद्र नागर की आठ फरवरी 2015 को नियाना गांव में एक शादी समारोह में दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। प्रधान हरेंद्र नागर के साथ उनके सरकारी गनर भूदेव शर्मा की भी हत्या हुई थी। एक बदमाश जतिन खत्री भी जवाबी कार्रवाई में मारा गया था।
कौन है सुंदर भाटी
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आतंक का पर्याय रहे ग्रेटर नोएडा के घंघौला गांव निवासी कुख्यात सुंदर भाटी का 30 साल का आपराधिक साम्राज्य है। राजनीतिक गलियारों में अच्छी पैठ थी। पैठ भी ऐसी कि वह जेल में रहने के दौरान खेल प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के साथ पुरस्कार बांटता था। जनवरी, 2015 में उसका गौतमबुद्धनगर जिला जेल के अंदर से फोटो वायरल हुआ था, जिसे जेल के एक अधिकारी ने ही भेजा था।
बुलंदशहर में ट्रांसपोर्ट का ठेकेदार था भाटी
जरायम की दुनिया में आने से पहले वह सुदंर भाटी बुलंदशहर का ट्रांसपोर्ट ठेकेदार हुआ करता था। इसी दौरान राजनेताओं से रिश्ते बढ़े तो राजनीतिक हत्याओं में हाथ आजमाने लगा। सुंदर की राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही है। इसी बीच इसका साथी नरेश भाटी जिला पंचायत चेयरमैन बन गया। बाद में सुंदर ने चेयरमैन नरेश भाटी की हत्या कर दी थी। उसके बाद सुंदर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह ताबड़तोड़ वारदात करता रहा। उसको पहली बार सजा 2015 में सपा नेता व प्रधान हरेंद्र नागर हत्याकांड में ही हुई।
सुंदर भाटी गिरोह की कार्यशैली
सुंदर भाटी गिरोह के गुर्गों का मुख्य कार्य रंगदारी वसूलना, सुपारी किलिंग , स्क्रैप के ठेके लेना, सरिया चोरी आदि था। पूर्वांचल की कई चर्चित हत्याओं में इस गिरोह का नाम चर्चा में आता रहा है।
सुंदर के इशारे पर अतीक के हत्यारों तक पहुंची जिगाना पिस्टल?
प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार शाम गोली मारकर हत्या में भी सुंदर भाटी का नाम आया था। चर्चा थी कि सुंदर भाटी के इशारे पर अतीक-अशरफ की हत्या में गिरफ्तार लवलेश तिवारी, रोहित उर्फ सनी सिंह और अरुण मौैर्या तक जिगाना पिस्टल पहुंचाई गई थी। हालांकि, बाद में भाटी के हत्याकांड में परोक्ष-अपरोक्ष रूप से शामिल होने की पुष्टि नहीं हो सकी थी।