Judgement : इंदौर में था शख्स, पुलिस ने बना दिया चश्मदीद... 28 साल बाद केस खत्म
यह आदेश अपर जिला व सत्र न्यायाधीश अंजू कनौजिया की अदालत ने दिया। मामला प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र के हेमापुर गांव का है। 16 दिसंबर 1996 को कन्हैया लाल शुक्ला ने रामगढ़ कोठारी गांव के भरत यादव, दूधनाथ, संजय यादव, केश कुमार के खिलाफ जानलेवा हमला करने व गालीगलौज करने की एफआईआर दर्ज कराई थी।
विस्तार
चुनावी रंजिश में जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने एक ऐसे शख्स को चश्मदीद गवाह बना दिया, जो वारदात के समय मौके पर नहीं बल्कि इंदौर में मौजूद था। अभियोजन की बेदम कहानी फिर भी 28 साल तक जिला अदालत में खिंच गई। आखिरकार इंसाफ हुआ और चारों आरोपी दोष्मुक्त करार दिए गए। अदालत ने वारदात से मुकरने व झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले मुद्दई के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश अपर जिला व सत्र न्यायाधीश अंजू कनौजिया की अदालत ने दिया। मामला प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र के हेमापुर गांव का है। 16 दिसंबर 1996 को कन्हैया लाल शुक्ला ने रामगढ़ कोठारी गांव के भरत यादव, दूधनाथ, संजय यादव, केश कुमार के खिलाफ जानलेवा हमला करने व गालीगलौज करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। कहा कि चारों आरोपी हेमापुर नहर पर घात लगाए बैठे थे। कन्हैया लाल पहुंचे तो उन्होंने पीछे से सिर पर लाठी-डंडे से हमला कर दिया। गांव के अनिल मिश्रा ने घायल अवस्था में उन्हें थाने पहुंचाया।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर चारों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। गवाहों की सूची में कन्हैया को मुद्दई और अनिल को चश्मदीद बताया।करीब 28 साल चले ट्रायल के दौरान मुद्दई बोला कि उस पर हमला किसने किया, यह नहीं देख पाया था। कहा कि सिर पर चोट लगने से बेहोश हो गया था। जब आंख खुली तो थाने में था। लोगों के कहने पर आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करा दिया। वहीं, चश्मदीद अनिल ने कहा कि वह न तो मौके पर था और न ही पुलिस को बयान दिया। घटना वाले दिन नौकरी के सिलसिले में इंदौर में था।
कोर्ट ने मुद्दई और चश्मदीद को पक्षद्रोही करार देते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने मुद्दई कन्हैया के खिलाफ नोटिस जारी कर झूठा साक्ष्य प्रस्तुत कर अदालत को गुमराह करने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।