High Court : हाईकोर्ट ने विस्तृत आदेश न देने पर बीएसए पर लगाया दो हजार रुपये हर्जाना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएसए बरेली पर विस्तृत आदेश न देने पर दो हजार रुपये हर्जाना लगाया है। इसके साथ ही सचिव बेसिक शिक्षा उप्र लखनऊ को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि सभी बीएसए आदेश का सारांश वेबसाइट पर अपलोड करने से पहले विस्तृत आदेश संबंधित कर्मचारी को अवश्य दें।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएसए बरेली पर विस्तृत आदेश न देने पर दो हजार रुपये हर्जाना लगाया है। इसके साथ ही सचिव बेसिक शिक्षा उप्र लखनऊ को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करें कि सभी बीएसए आदेश का सारांश वेबसाइट पर अपलोड करने से पहले विस्तृत आदेश संबंधित कर्मचारी को अवश्य दें। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने हेमलता सागर की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
याची बरेली के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बरेली ने उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि का आदेश जारी किया। आदेश की प्रति याची को नहीं दी और आदेश का सारांश वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। बिना मूल आदेश के सारांश आदेश के आधार पर याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि प्रदेश के बेसिक शिक्षा अधिकारी वेबसाइट पर विस्तृत आदेश के बजाय सारांश आदेश अपलोड कर रहे हैं। विस्तृत आदेश कर्मचारी को नहीं भेजा जा रहा। ऐसे में सारांश आदेश रद्द भी कर दिया जाए तो विस्तृत आदेश रद्द नहीं होगा। कोर्ट ने बीएसए पर दो हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए मूल आदेश की प्रति के साथ हर्जाना राशि याची को देने का निर्देश दिया है।