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संघर्ष : जहां की लड़कियां घर से नहीं निकलतीं, वहां की बेटी ने बदल दिया नजरिया

Wed, 22 Nov 2023 02:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 22 Nov 2023 02:30 PM IST
सार

वह एक ऐसे गांव से हैं, जहां लड़कियां घर से निकलती तक नहीं हैं। वे सिर्फ स्कूल में ही खेल पाती थीं। उन्होंने बताया कि वे लंगड़ी, खो-खो, कबड्डी जैसे खेलों में बहुत अच्छी थीं। इसके चलते उन्हें स्कूल का स्पोर्ट्स कैप्टन बना दिया गया।

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The daughter of the place where girls do not leave the house changed her perspective
श्रेया तिवारी, खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश की सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयनित होने वाली श्रेया तिवारी की कहानी संघर्षों से भरी रही है। मिर्जापुर के बनौधा गांव की रहने वाली श्रेया इविवि में एलएलएम की छात्रा हैं। वह विवेकानंद मार्ग पर हॉस्टल में रहकर मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में फुटबॉल प्रशिक्षक संजय सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं।

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उन्होंने बताया कि वह एक ऐसे गांव से हैं, जहां लड़कियां घर से निकलती तक नहीं हैं। वे सिर्फ स्कूल में ही खेल पाती थीं। उन्होंने बताया कि वे लंगड़ी, खो-खो, कबड्डी जैसे खेलों में बहुत अच्छी थीं। इसके चलते उन्हें स्कूल का स्पोर्ट्स कैप्टन बना दिया गया। स्कूल खत्म हुआ तो उन्हें लगा कि उन्होंने खेल को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, जब वे कॉलेज पहुंचीं तो उन्होंने लड़कियों को फुटबॉल खेलते देखा।
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इसके बाद उन्होंने निर्णय लिया कि वह भी फुटबॉल खेलेंगी। इस खेल में अच्छा अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें टीम का कैप्टन बना दिया गया। हालांकि उनकी दिक्कतें यहां खत्म नहीं हुईं। घर में किसी को भी उनके फुटबॉल खेलने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने अपना खेल जारी रखने के लिए एक्स्ट्रा क्लास और कोचिंग का बहाना तक बनाया। इसके बाद उनका चयन यूनिवर्सिटी टीम में हो गया।

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विश्वविद्यालय स्तर तक खेलने की मिली थी अनुमति

उन्होंने हिम्मत कर घर पर अपने फुटबॉल खेल के बारे में बताया। पिता रमेश तिवारी और मां सीता तिवारी ने साफ मना कर दिया। इस मौके पर भाई ने उनका साथ दिया और पिता से बात की। इसके बाद उन्हें इस शर्त पर अनुमति मिली की वे यूनिवर्सिटी स्तर पर खेलकर खेल छोड़ देंगी। उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की ओर से अच्छा प्रदर्शन किया। पिता ने जब उनके प्रदर्शन के बारे में सुना तो उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद किसी ने उन्हें खेलने से कभी मना नहीं किया।

गाजियाबाद में 24 नवंबर से तीन दिसंबर तक आयोजित होने वाली राष्ट्रीय सीनियर महिला फुटबॉल चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश टीम में शामिल श्रेया तीन बार यूनिवर्सिटी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता का हिस्सा बन चुकी हैं। वहीं, दो बार स्टेट चैंपियनशिप में मिर्जापुर का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। राइट बैक डिफेंडर पोजिशन पर खेलने वाली श्रेया का सपना भारतीय महिला फुटबॉल टीम की ओर से खेलने का है। वह वर्तमान में इविवि की फुटबॉल टीम का भी हिस्सा हैं।

पढ़ाई में भी हैं अव्वल

श्रेया बताती हैं कि अकसर कहा जाता है कि खेल से पढ़ाई पर असर पड़ता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। वह अपने खेल को पूरा समय देती हैं। इसके बावजूद वह पढ़ाई में भी अव्वल हैं। इविवि में एलएलबी के चौथे सेमेस्टर में उन्होंने कॉलेज टॉप कर इसे साबित भी किया है।

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