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फैसला : आयोग ने चिकित्सीय लापरवाही पर डॉ. विनय स्वरूप पर लगाया दो लाख रुपये का मुआवजा
Wed, 20 Aug 2025 05:47 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 20 Aug 2025 05:47 PM IST
सार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डॉ. विनय स्वरूप को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी करार देते हुए परिवादी राम प्रकाश राय को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डॉ. विनय स्वरूप को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी करार देते हुए परिवादी राम प्रकाश राय को दो लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 10 हजार रुपये वाद व्यय देने का भी निर्देश दिया है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम व सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने दिया है।
तेलियरगंज, शिवपुरी, गोविंदपुर कॉलोनी निवासी राम प्रकाश राय ने डॉ. विनय स्वरूप व राज्य स्तरीय टीबी चिकित्सालय तेलियरगंज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. फारुख के खिलाफ 17 मार्च 2017 को परिवाद दाखिल किया गया था। आरोप लगाया था कि वह मधुमेह के मरीज हैं और उन्होंने दिसंबर 2010 से डॉ. विनय स्वरूप से इलाज करा रहे थे।
खांसी और पैरों में जलन की शिकायत पर एक्स-रे में टीबी का संदेह होने पर बलगम जांच कराया जो नेगेटिव आया। इसके बाद भी टीबी की दवा शुरू कर दी। ठीक न होने पर स्वयं को टीवी का मरीज मानकर डॉ. फारुख को दिखाया। उन्होंने भी टीवी के दवा शुरू कर दी। गलत दवा से हालत बिगड़ी तो एसआरएन अस्पताल भेजा गया। इसके बाद एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर किया गया। वहां जांच के बाद यह पाया गया कि वह टीबी के मरीज नहीं थे और टीबी की दवा बंद कर दी गई। किडनी का मरीज पाया गया।
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आयोग ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि डॉ. विनय स्वरूप ने लापरवाही से काम किया। गलत और लापरवाहीपूर्ण इलाज के कारण परिवादी को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति हुई है। आयोग ने दो लाख रुपये मुआवजे की राशि को दो महीने के भीतर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया गया है। वहीं, दूसरे विपक्षी डॉ. फारूख के खिलाफ परिवाद को खारिज कर दिया गया। आयोग ने कहा कि सरकारी डॉक्टर होने के कारण डॉ. फारूख उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में नहीं आते।
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तेलियरगंज, शिवपुरी, गोविंदपुर कॉलोनी निवासी राम प्रकाश राय ने डॉ. विनय स्वरूप व राज्य स्तरीय टीबी चिकित्सालय तेलियरगंज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. फारुख के खिलाफ 17 मार्च 2017 को परिवाद दाखिल किया गया था। आरोप लगाया था कि वह मधुमेह के मरीज हैं और उन्होंने दिसंबर 2010 से डॉ. विनय स्वरूप से इलाज करा रहे थे।
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खांसी और पैरों में जलन की शिकायत पर एक्स-रे में टीबी का संदेह होने पर बलगम जांच कराया जो नेगेटिव आया। इसके बाद भी टीबी की दवा शुरू कर दी। ठीक न होने पर स्वयं को टीवी का मरीज मानकर डॉ. फारुख को दिखाया। उन्होंने भी टीवी के दवा शुरू कर दी। गलत दवा से हालत बिगड़ी तो एसआरएन अस्पताल भेजा गया। इसके बाद एसजीपीजीआई लखनऊ रेफर किया गया। वहां जांच के बाद यह पाया गया कि वह टीबी के मरीज नहीं थे और टीबी की दवा बंद कर दी गई। किडनी का मरीज पाया गया।
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आयोग ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि डॉ. विनय स्वरूप ने लापरवाही से काम किया। गलत और लापरवाहीपूर्ण इलाज के कारण परिवादी को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति हुई है। आयोग ने दो लाख रुपये मुआवजे की राशि को दो महीने के भीतर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया गया है। वहीं, दूसरे विपक्षी डॉ. फारूख के खिलाफ परिवाद को खारिज कर दिया गया। आयोग ने कहा कि सरकारी डॉक्टर होने के कारण डॉ. फारूख उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में नहीं आते।