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निरंजनी अखाड़े के एक और युवा संन्यासी की संदिग्ध मौत का सामने आया राज
Tue, 18 May 2021 10:01 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 18 May 2021 10:01 PM IST
सार
- निस्कासित संत स्वामी आनंद गिरि का खुलासा, आशीष की तरह ही दिगंबर गंगापुरी की आश्रम में मिली थी लाश
- आशीष गिरी के साथ गंगापुरी की संदिग्ध मौत की जांच कराने की उठाई मांग
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आनंद गिरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
निरंजनी अखाड़े से निष्कासित योग गुरु स्वामी आनंद गिरि ने अपने मंगलवार को अखाड़े के एक और युवा संत की मौत का खुलासा किया। पुलिस को भेजी शिकायत में उन्होंने कहा है कि महंत आशीष गिरि की तरह ही अखाड़े के युवा संत दिगंबर गंगापुरी की भी संदिग्ध मौत हुई थी। महंत गंगापुरी की मौत को भी आत्महत्या बताकर हकीकत पर परदा डाल दिया गया था। आशीष गिरि के साथ महंत गंगापुरी की संदिग्ध मौत की जांच की जानी चाहिए।
स्वामी आनंद गिरि ने मंगलवार को अपने गुरु अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि पर हमला तेज कर दिया। निष्कासन के बाद इस दिन उन्होंने अपना दूसरा वीडियो जारी कर अखाड़े की संपत्ति को लेकर गुरु पर गंभीर आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में स्वामी आनंद गिरि ने कहा है कि संपत्ति के विवाद में ही निरंजनी अखाड़े से जुड़े दोनों युवा संतों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। आश्रम में उनके शव पाए गए थे।
उन्होंने अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि और अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि का नाम लेकर कहा कि वह तीन या 10 वर्ष नहीं पूरे जीवन भर के लिए
बाल्यकाल से ही संन्यास ले चुके हैं। इसलिए उनका पूरा जीवन ही तप में बीतना है, लेकिन, मठ और अखाड़े को बर्बादी से बचाना भी उनका कर्तव्य है। स्वामी आनंद गिरि ने खुलकर कहा कि मठ और अखाड़े से जुड़े इस संपत्ति के विवाद में गुरुजी उनकी किसी भी समय हत्या करवा सकते हैं, लेकिन अब वह सत्य के जिस मार्ग पर चल पड़े हैं, उससे पीछे हटेंगे नहीं।
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उन्होंने कहा कि अखाड़े की संपत्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है। हमें इसका संवर्धन और संरक्षण करना चाहिए न कि इसको बर्बाद करना चाहिए। स्वामी आनंद गिरी ने यह भी कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि उनके गुरु हैं और आगे भी गुरु ही रहेंगे, लेकिन ऐसा लग रहा है कि किसी के दबाव में अखाड़े की संपत्ति को वे नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसे रोका जाना चाहिए। उधर, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि यह सब आरोप झूठा है। जब इस प्रकरण की जांच होगी, तो खुद ही सचाई सामने आ जाएगी।
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स्वामी आनंद गिरि ने मंगलवार को अपने गुरु अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि पर हमला तेज कर दिया। निष्कासन के बाद इस दिन उन्होंने अपना दूसरा वीडियो जारी कर अखाड़े की संपत्ति को लेकर गुरु पर गंभीर आरोप लगाए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में स्वामी आनंद गिरि ने कहा है कि संपत्ति के विवाद में ही निरंजनी अखाड़े से जुड़े दोनों युवा संतों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। आश्रम में उनके शव पाए गए थे।
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उन्होंने अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि और अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि का नाम लेकर कहा कि वह तीन या 10 वर्ष नहीं पूरे जीवन भर के लिए
बाल्यकाल से ही संन्यास ले चुके हैं। इसलिए उनका पूरा जीवन ही तप में बीतना है, लेकिन, मठ और अखाड़े को बर्बादी से बचाना भी उनका कर्तव्य है। स्वामी आनंद गिरि ने खुलकर कहा कि मठ और अखाड़े से जुड़े इस संपत्ति के विवाद में गुरुजी उनकी किसी भी समय हत्या करवा सकते हैं, लेकिन अब वह सत्य के जिस मार्ग पर चल पड़े हैं, उससे पीछे हटेंगे नहीं।
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उन्होंने कहा कि अखाड़े की संपत्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है। हमें इसका संवर्धन और संरक्षण करना चाहिए न कि इसको बर्बाद करना चाहिए। स्वामी आनंद गिरी ने यह भी कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि उनके गुरु हैं और आगे भी गुरु ही रहेंगे, लेकिन ऐसा लग रहा है कि किसी के दबाव में अखाड़े की संपत्ति को वे नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसे रोका जाना चाहिए। उधर, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि यह सब आरोप झूठा है। जब इस प्रकरण की जांच होगी, तो खुद ही सचाई सामने आ जाएगी।