फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Stones from rejected mines were used in River Front project, crores have been paid.

अनियमितता : रिवर फ्रंट परियोजना में रिजेक्ट खदानों के पत्थरों का इस्तेमाल, करोड़ों का हो चुका है भुगतान

Wed, 28 Aug 2024 03:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 28 Aug 2024 03:40 PM IST
सार

गंगा पथ के रूप में 240 करोड़ रुपये की लागत वाली रिवर फ्रंट टाइप सात सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत शासन से की गई है। रिवर फ्रंट का निर्माण गंगा की कटान रोकने और साथ में इंटरलाकिंग पाथवे से संगम को जोड़ने के लिए किया जा रहा है।

विज्ञापन
Stones from rejected mines were used in River Front project, crores have been paid.
गंगा रिवर फ्रंट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ की महत्वाकांक्षी रिवर फ्रंट परियोजना में रिजेक्ट खदानों के कमजोर पत्थर लगाने की बात सामने आई है। लोहे का जाल बनाकर गंगा किनारे 70 फीसदी पत्थर बिछाए जा चुके हैं। इसमें करोड़ों रुपये का भुगतान हो चुका है। पता चला है कि कार्यदायी संस्था के अभियंताओं ने रिजेक्ट खदानों से पत्थर की आपूर्ति परियोजना के एस्टीमेट में ही शामिल कर ली है। उच्चाधिकारियों का कहना है इसकी तस्दीक कराई जा रही है।

विज्ञापन


गंगा पथ के रूप में 240 करोड़ रुपये की लागत वाली रिवर फ्रंट टाइप सात सड़कों के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत शासन से की गई है। रिवर फ्रंट का निर्माण गंगा की कटान रोकने और साथ में इंटरलाकिंग पाथवे से संगम को जोड़ने के लिए किया जा रहा है।
विज्ञापन


महाकुंभ में इस बार 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। भीड़ की राह सुगम बनाने के लिए गंगा पथ के निर्माण में रिजेक्ट क्यूरी के पत्थर लगाने की बात आई है। गंगा के दोनों किनारों पर लगभग 13.75 किमी की सात सड़कों की चौड़ाई औसतन 10 मीटर है। यह पथ गंगा से लगे शहर की तरफ स्टेनली रोड बेली कछार से रसूलाबाद घाट, गंगेश्वर महादेव मंदिर होते हुए नागवासुकि मंदिर और फिर दारागंज सब्जी मंडी से शास्त्री सेतु तक बनाई जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

दूसरी ओर, झूंसी की तरफ सूरदास पार्किंग से छतनाग के पास तक गंगा पथ का निर्माण होना है। इसके लिए पत्थर के जाल बिछाए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता उदय प्रताप सिंह ने शिकायत में कहा है कि इस तरह के निर्माण में मिर्जापुर के अहरौरा और अदलहाट की खदानों के ही पत्थर स्वीकृत हैं, जबकि सिंचाई विभाग के जेई-ठेकेदार मेजा और शंकरगढ़ की खदानों के घटिया किस्म के कमजोर पत्थर लगा रहे हैं।

यह क्षमता विहीन बलुआ पत्थर पानी में कटान रोकने की बजाय कम समय में ही नष्ट हो सकते हैं। इस बार की बारिश और बाढ़ में परियोजना पूरी होने से पहले ही इसका असर दिखने लगा है। पता चला है कि सिंचाई विभाग के अफसरों ने एस्टीमेट में ही मेजा और शंकरगढ़ की रिजेक्ट खदानों के पत्थर लगाने की स्वीकृति ले रखी है।

मेजा और शंकरगढ़ की खदानों के पत्थर रिवर फ्रंट में लगाने की बात एस्टीमेट में होने की बात कही जा रही है। इन खदानों को रिजेक्ट किए जाने की शिकायत की जांच कराई जा रही है। इसकी पुष्टि होने के बाद कदम उठाया जाएगा। - डीएन शुक्ला, अधिशासी अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed