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श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद : मंदिर पक्ष का तर्क- सरकारी दस्तावेजों में शाही ईदगाह के नाम नहीं है कोई संपत्ति

Thu, 02 May 2024 07:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 02 May 2024 07:26 PM IST
सार

मंदिर पक्ष ने हाईकोर्ट में कहा कि खसरा और नगर निगम के रिकॉर्ड में भी ट्रस्ट के नाम पर ही जमीन दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में कहीं भी शाही ईदगाह के नाम कोई भी जमीन नहीं है। इस मामले में वर्शिप एक्ट, लिमिटेशन एक्ट, वक्फ एक्ट के अधिनियम लागू नहीं होते हैं। कहा कि वक्फ संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का मुतवल्ली होता है, जबकि ईदगाह में ऐसा नहीं है।

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Shri Krishna Janmabhoomi dispute: Temple side's argument - There is no property in the name of Shahi Idgah in
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान मंदिर पक्षकार की ओर से कहा गया कि सरकारी दस्तावेजों में शाही ईदगाह के नाम से कोई संपत्ति नहीं है। ये अवैध तरीके से काबिज है। साथ ही कहा कि वक्फ संपत्ति दान में मिली संपत्ति होती है, वक्फ बोर्ड बताए कि उसे किसने विवादित संपत्ति दान में दी है। वहीं शाही ईदगाह के पक्षकार ने कहा कि इस मामले में वाद पोषणीय नहीं है।

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न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की कोर्ट में वाद की पोषणीयता को लेकर सुनवाई की जा रही है। अगली सुनवाई 7 जुलाई 24 को होगी।श्रीकृष्ण जन्म भूमि मुक्ति निर्माण के अध्यक्ष व मंदिर पक्षकार आशुतोष पांडेय ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि ऑर्डर 7 नियम 11 इस मामले में लागू नहीं होता है। कहा कि 13 एकड़ जमीन लड्डू गोपाल की है। इसे कोई न बेच सकता है और न कोई इस जमीन का समझौता कर सकता है। यह पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम दर्ज है। ट्रस्ट ही बिजली का बिल और टैक्स जमा करता है।
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खसरा और नगर निगम के रिकॉर्ड में भी ट्रस्ट के नाम पर ही जमीन दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में कहीं भी शाही ईदगाह के नाम कोई भी जमीन नहीं है। इस मामले में वर्शिप एक्ट, लिमिटेशन एक्ट, वक्फ एक्ट के अधिनियम लागू नहीं होते हैं। कहा कि वक्फ संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का मुतवल्ली होता है, जबकि ईदगाह में ऐसा नहीं है। आगे कहा कि वक्फ की तरफ से जो प्रार्थना पत्र व शपथपत्र दाखिल की गई है उसपर वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के हस्ताक्षर नहीं हैं, ये फर्जी हैं।

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वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता विण्णु शंकर जैन ने पक्ष रखते हुए कहा कि विवादित संपत्ति का पूर्ण भाग पर प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम 1958 के प्रावधान लागू हैं। इसकी अधिसूचना 26 फरवरी 1920 को ही जारी की जा चुकी है। अब इस संपत्ति पर वक्फ के प्रावधान लागू नहीं होंगे। अन्य कई दलीलें दीं।

इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी, वीडियो कांफ्रेंसिंग से वरिष्ठ अधिवक्ता तसनीम अहमदी, अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह, अधिवक्ता सत्यवीर सिंह, अधिवक्ता नसीरुज्जमा, अधिवक्ता इमरान आदि अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद रहे।

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