{"_id":"6ac6a22013b1f7312d09c3aa","slug":"setback-for-kapil-muni-and-surya-bhan-karwaria-from-the-high-court-second-bail-plea-also-rejected-allahabad-news-c-3-ald1020-992532-2026-10-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: हाईकोर्ट से कपिल मुनि व सूर्य भान करवरिया को झटका, दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: हाईकोर्ट से कपिल मुनि व सूर्य भान करवरिया को झटका, दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट से करवरिया बंधुओं को झटका लगा है। उनकी दूसरी जमानत अर्जियां भी खारिज कर दी हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने सूर्य भान करवरिया, कपिल मुनि करवरिया और रामचन्द्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू की ओर से अपील में दाखिल जमानत अर्जियों पर दिया है।
अपीलकर्ताओं की पहली जमानत अर्जियां नौ मई 2023 को खारिज कर दी गई थीं। यह उनकी दूसरी जमानत अर्जी थी। उदय भान करवरिया की सजा राज्य सरकार की ओर से कम कर दी गई है, इसलिए उन्होंने दूसरी जमानत अर्जी दायर नहीं की थी। अपीलकर्ताओं ने अपनी दूसरी जमानत अर्जियों में कारावास की अवधि और दो साल से अधिक समय तक अपीलों की सुनवाई न होने को आधार बनाते हुए जमानत मांगी थी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि नौ मई 2023 से लगातार अपीलकर्ताओं के वकीलों को अपीलों पर बहस करने के लिए कहा जा रहा था लेकिन हर तारीख पर उन्होंने केवल अल्पकालिक जमानत अर्जियों पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता और अपीलों की सुनवाई से बचने के अपीलकर्ताओं के आचरण को देखते हुए कारावास की अवधि के आधार पर भी जमानत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन जमानत अर्जियों की अस्वीकृति का मतलब धारा 391 सीआरपीसी के तहत आवेदन की अस्वीकृति नहीं है और उस पर विचार अपील की सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है। इन आपराधिक अपीलों की अंतिम सुनवाई अब 30 अक्तूबर 2026 को होगी।
आजीवन कारावास की ट्रायल कोर्ट ने सुनाई है सजा
वर्ष 1996 में सपा के तत्कालीन विधायक जवाहर पंडित की सिविल लाइन में एक-47 से गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व विधान परिषद सदस्य सूर्यभान करवरिया, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू को इस मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ट्रायल कोर्ट की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है।
विज्ञापन
अपीलकर्ताओं की पहली जमानत अर्जियां नौ मई 2023 को खारिज कर दी गई थीं। यह उनकी दूसरी जमानत अर्जी थी। उदय भान करवरिया की सजा राज्य सरकार की ओर से कम कर दी गई है, इसलिए उन्होंने दूसरी जमानत अर्जी दायर नहीं की थी। अपीलकर्ताओं ने अपनी दूसरी जमानत अर्जियों में कारावास की अवधि और दो साल से अधिक समय तक अपीलों की सुनवाई न होने को आधार बनाते हुए जमानत मांगी थी।
विज्ञापन
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि नौ मई 2023 से लगातार अपीलकर्ताओं के वकीलों को अपीलों पर बहस करने के लिए कहा जा रहा था लेकिन हर तारीख पर उन्होंने केवल अल्पकालिक जमानत अर्जियों पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता और अपीलों की सुनवाई से बचने के अपीलकर्ताओं के आचरण को देखते हुए कारावास की अवधि के आधार पर भी जमानत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन जमानत अर्जियों की अस्वीकृति का मतलब धारा 391 सीआरपीसी के तहत आवेदन की अस्वीकृति नहीं है और उस पर विचार अपील की सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है। इन आपराधिक अपीलों की अंतिम सुनवाई अब 30 अक्तूबर 2026 को होगी।
आजीवन कारावास की ट्रायल कोर्ट ने सुनाई है सजा
वर्ष 1996 में सपा के तत्कालीन विधायक जवाहर पंडित की सिविल लाइन में एक-47 से गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व विधान परिषद सदस्य सूर्यभान करवरिया, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया और रामचंद्र त्रिपाठी उर्फ कल्लू को इस मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। ट्रायल कोर्ट की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है।