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Sawan 2025 : संगम की रेती पर बाढ़ में 30 फीट ऊंचे मचान पर हो रहा बाबा भोलेनाथ का रुद्राभिषेक

Sat, 19 Jul 2025 04:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Jul 2025 04:26 PM IST
सार

Sawan News 2025 : संगम की रेती पर बाढ़ के बीच झूंसी की ओर एक ऐसा शिविर कहें या फिर आश्रम है जहां पर सावन के महीने में रोजाना 30 फीट ऊंचे लकड़ी के बने मचान पर बाबा भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जा रहा है।

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Sawan 2025 : Rudrabhishek of Baba Bholenath is being done on a 30 feet high scaffolding in the flood
पिछले साल नई झूंसी के कांवड़ियों की ओर से ले जाया गया भगवान शिव का मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगम की रेती पर बाढ़ के बीच झूंसी की ओर एक ऐसा शिविर कहें या फिर आश्रम है जहां पर सावन के महीने में रोजाना 30 फीट ऊंचे लकड़ी के बने मचान पर बाबा भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया जा रहा है। इसके साथ ही तकरीबन 50 फीट की ऊंचाई पर बनाई गई अखंड ज्योति में पिछले 20 साल से अनवरत राम नाम का दिया जलाया जा रहा है। यह शिविर या फिर आश्रम, देश के प्रसिद्ध संत देवरहवा बाबा के करीबी शिष्य रहे स्वामी रामदास जी महाराज लगाते हैं।

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तकरीबन पांच माह पहले महाकुंभ के दौरान संगम की रेती जहां धर्म और आध्यात्म के साथ-साथ देश के बड़े साधु-संताें और उनके भव्य शिविरों से गुंजायमान थी। आज उस संगम की रेती को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। बाढ़ भी इस कदर कि सबकुछ अपने साथ बहा ले जाना चाहती है। इसके बावजूद उसी संगम की रेती पर झूंसी की ओर आज भी एक ऐसा शिविर स्थापित है जो पिछले 20 वर्ष से चर्चा में है। बात हो रही है देवरहवा बाबा के शिविर की। तकरीबन 20 साल पहले देवरहवा बाबा केे करीबी शिष्य स्वामी रामदास जी महाराज ने इस शिविर या फिर आश्रम की स्थापना की थी।
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आज भी वह मचान और अखंड ज्योति वहीं पर स्थापित है। चाहे बाढ़ आए या फिर तूफान, अखंड ज्योति अनवरत जलती रहती है। शास्त्री पुल से यह अखंड ज्योति साफ दिखाई देती है। सुबह और शाम आश्रम के विशेष लोग नाव से जाकर अखंड ज्योति का दिया जलाते हैं। देवरहवा बाबा को समर्पित यह मचान और कुटिया महाकुंभ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र थी। तब इस शिविर में स्वामी रामदास जी महाराज की अगुवाई में 24 घंटे अनवरत लंगर चलाया गया था।

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अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 20 साल पहले जलाई गई थी अखंड ज्योति

स्वामी रामदास जी महाराज बताते हैं कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए यह ज्योति आज से तकरीबन 20 साल पहले यहां जलाई गई थी। इसके साथ ही यह स्थान इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि यहां देवरहा बाबा बैठकर साधना करने के साथ ही श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी देते थे। यहीं से उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन भी किया था। महंत रामदास जी महाराज बताते हैं कि अखंड ज्योति की लौ कभी कम नहीं होने दी जाती है। इस वक्त जब बाढ़ के दौरान पानी तकरीबन 20 फीट ऊपर तक आ गया है। तब भी अखंड ज्योति में घी डालने के लिए शिविर के लोग नाव से जाते हैं जिससे बराबर ज्योति प्रज्ज्वलित होती रहे। सावन के महीने में स्वामी रामदास रोजाना अपने शिष्यों के साथ नाव से यहां पहुंचकर मचान पर बैठकर रुद्राभिषेक भी कर रहे हैं।

50 फीट की ऊंचाई पर यूके लिप्टस के पेड़ पर स्थापित है अखंड ज्योति

झूंसी। स्वामी रामदास बताते हैं कि जिस तरह से देवरहवा बाबा संसार से दूर रहने के लिए ऊंचे मचान पर बैठकर भक्तों को आशीर्वाद देते थे। उसी आधार पर यहां भी 30 फीट की ऊंचाई पर मचान यूके लिप्टस के पेड़ पर बनाया गया है। इसी तरह अखंड ज्योति भी तकरीबन 50 फीट की ऊंचाई पर है। बगल से ही उतनी ही लंबी लोहे की सीढ़ी लगाई है जिससे ऊपर जाकर अखंड ज्योति में घी डाला जा सके। इसके ठीक सामने 30 फीट ऊंची दूसरी मचान है, जो घास-फूस से बनाया गया है। उसमें देवरहा बाबा की मूर्ति स्थापित है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी सहित देश की अन्य महान विभूतियां देवरहा बाबा से आशीर्वाद लेने के लिए आती थीं। वह कभी भी मंच से नीचे नहीं उतरते थे, बल्कि आशीर्वाद और प्रसाद मंच के ऊपर से ही देते थे।

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