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राजस्व परिषद : जमीन से जुड़े वरासत मामले में तहसीलदार का आदेश निरस्त

Sun, 25 Jan 2026 06:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 25 Jan 2026 06:02 PM IST
सार

राजस्व परिषद ने जमीन की वरासत को लेकर चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोरांव के तहसीलदार के स्थगन आदेश को निरस्त कर मामले का छह माह में निस्तारण का निर्देश दिया है।

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Revenue Council: Tehsildar's order in land-related inheritance case cancelled
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राजस्व परिषद ने जमीन की वरासत को लेकर चल रहे विवाद में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोरांव के तहसीलदार के स्थगन आदेश को निरस्त कर मामले का छह माह में निस्तारण का निर्देश दिया है। यह आदेश परिषद सदस्य(न्यायिक) साहब सिंह ने सुशीला देवी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर दिया। विवाद कोरांव तहसील के गांव मणफाकला निवासी मृतक रूद्र नारायण उर्फ रूप नारायण की जमीन की वरासत (नामांतरण) को लेकर है।

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मृतक की पत्नी सुशीला देवी का नाम 14 जुलाई 1994 के आदेश से विधवा वारिस के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। बाद में रामरती देवी पक्ष की ओर से आपत्ति दाखिल की गई। आपत्ति में कहा गया कि मृतक निसंतान थे और सुशीला देवी का नाम गलत तरीके से दर्ज कराया गया है। इसी आधार पर सुशीला देवी का नाम हटाने और अन्य उत्तराधिकारियों का नाम दर्ज करने की मांग की गई।

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रामरती देवी पक्ष की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर तहसीलदार कोरांव ने 13 अक्तूबर 2025 को राजस्व निरीक्षक की ओर से पारित वरासत आदेश के अमल पर वाद निस्तारण तक रोक लगा दी थी। याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि वाद के निस्तारण तक रोक लगाना कानून के अनुरूप नहीं है। अनिश्चितकालीन स्थगन से एक पक्ष को नुकसान होता है। ऐसे आदेशों से मामले वर्षों तक लटकते रहते हैं। परिषद ने तहसीलदार कोरांव का आदेश निरस्त करते हुए स्थगन प्रार्थना पत्र एक माह में निस्तारित किया जाने का निर्देश दिया। साथ ही दोनों पक्षों को सुनवाई और साक्ष्य का पूरा अवसर देते हुए पूरा वरासत विवाद छह माह के भीतर निस्तारित किए जाने का निर्देश दिया है। 
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