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‘अन्नदाता’ की कंगाली से कांपेगा कारोबार

Sat, 18 Apr 2015 01:08 AM IST
रणविजय सिंह/अमर उजाला इलाहाबाद
रणविजय सिंह/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Sat, 18 Apr 2015 01:08 AM IST
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इलाहाबाद। बेमौसम बारिश से परेशान किसानों की तंगहाली देख बाजार में भी उदासी छाने की आशंका बढ़ने लगी है। गेहूं, सरसों, आलू और चना जैसी फसलों के नष्ट होने से करोड़ों रुपये का कारोबार भी चौपट हो सकता है। तीन दिन बाद सहालग की शुरुआत के बावजूद बाजार बेदम है। कारोबारी भी इस प्राकृतिक आपदा पर सन्न हैं। सबसे बड़ा नुकसान सराफा, ट्रैक्टर और दुपहिया बाजार पर पड़ने की आशंका है।
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अनुमान है कि 48 फीसदी दोपहिया वाहन, 44 फीसदी टीवी सेट, 40 फीसदी चार पहिया वाहन और 45 फीसदी ज्वैलरी की बिक्री प्रभावित हो सकती है। बर्बाद फसल से गांव से लेकर शहर तक कोहराम मचा रखा है। खेत में ही फसलों के सड़ने से चौखट तक क्या पहुंचेगा, यह बता सकने की स्थिति अन्नदाता भी नहीं हैं। फसल नहीं होगी तो उसकी झोली खाली रह जाएगी। इस डर से सराफा कारोबारियों के चेहरे की रौनक अभी से गायब होने लगी है।
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समस्या इससे दो कदम आगे भी बढ़ने की आशंका है। कस्बों के सुनारों का कारोबार नहीं होगा तो शहर में ज्वैलरी मेकिंग के धंधे में लगे हजारों की रोजी-रोटी पर खतरा मंडरा सकता है। चड्ढा ज्वैलर्स के राकेश चड्ढा मानते हैं कि अप्रैल, मई और जून में 35-40 फीसदी ब्रांडेड ज्वैलरी की खरीदारी ग्रामीण क्षेत्र के लोग करते हैं। फसल नहीं होगी तो परंपरागत सराफा बाजार में यह असर बढ़कर 60 फीसदी से ऊपर पहुंच सकता है। नगदी न होने के कारण किसान बेटे-बेटियों की शादियों की तारीखें आगे बढ़ा सकते हैं।
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टाटा मोटर्स के महाप्रबंधक मनीष तिवारी भी मानते हैं कि चार पहिया वाहनों के कारोबार का 30-50 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र में है। वाहन बिक्री पर तत्काल असर भले न दिखे लेकिन अगले कई महीनों में बिक्री कम हो सकती है। हीरो बाइक के डीलर्स सरस्वती मोटर्स के प्रबंधक धीरेंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि ज्यादातर कंपनियों के शोरूम बड़े कस्बों में खुल चुके हैं। इन डीलर्स की ज्यादातर बिक्री किसानों के दम पर है। उनकी झोली खाली होगी तो बिक्री पर असर पड़ना तय है।


ग्रामीण क्षेत्र के सुनारों का बुरा हाल है।  परंपरागत सराफा का 70 फीसदी कारोबार किसानों पर निर्भर है। सहालग शुरू होने में चंद दिन ही बाकी हैं लेकिन ज्यादातर सुनारों को अब तक आर्डर नहीं मिले हैं। सामान्य स्थितियों में महीनेभर पहले ही आर्डर मिल जाते हैं, अबकी ऐसा नहीं है।
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