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प्रो. संगम लाल का व्यक्तित्व दर्शनजगत की अमूल्य निधि
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Prof. Sangam Lal Pandey philosopher
- फोटो : CITY DESK
राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर बोले पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी
प्रयागराज। प्रो. संगम लाल पांडेय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व दर्शनजगत एवं संपूर्ण भारत के लिए अमूल्य निधि है। यह बात पूर्व गवर्नर केशरीनाथ त्रिपाठी ने ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर कही।
‘प्रो. संगम लाल पांडेय के दार्शनिक अवदान की समकालीन प्रासंगिकता और शैक्षणिक उपादेयता’ विषय पर संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि केशरीनाथ ने कहा कि प्रो. पांडेय की मौलिकता वेदांत की विभिन्न शाखाओं में विरोध कर निवारण कर समन्वय स्थापित करने की चेष्टा है। विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सखाराम सिंह ने कहा कि यह संगोष्ठी प्रो. संगम लाल पांडेय के दर्शन क्षेत्र के विविध फलकों को जानने का सार्थक प्रयास है। उनका वेदांत आचार्य शंकर का अंधानुकरण न होकर वेदांत दर्शन का विवेकायुक्त सृजन है।
मुख्य वक्ता इविवि के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. एसके सेठ ने कहा कि प्रो. पांडेय को अध्ययन क्षेत्र इतना व्यापक है कि इसका संक्षेपण संभव नहीं है। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रो. आरसी सिन्हा ने कहा कि प्रो. पांडेय का वेदांत के समाज दर्शन पर महत्वपूर्ण कार्य एवं योगदान है। अतिथियों का स्वागत कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने किया। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. अमिता पांडेय ने प्रो. संगम लाल पांडेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष आरके श्रीवास्तव ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
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प्रयागराज। प्रो. संगम लाल पांडेय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व दर्शनजगत एवं संपूर्ण भारत के लिए अमूल्य निधि है। यह बात पूर्व गवर्नर केशरीनाथ त्रिपाठी ने ईश्वर शरण पीजी कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर कही।
‘प्रो. संगम लाल पांडेय के दार्शनिक अवदान की समकालीन प्रासंगिकता और शैक्षणिक उपादेयता’ विषय पर संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि केशरीनाथ ने कहा कि प्रो. पांडेय की मौलिकता वेदांत की विभिन्न शाखाओं में विरोध कर निवारण कर समन्वय स्थापित करने की चेष्टा है। विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सखाराम सिंह ने कहा कि यह संगोष्ठी प्रो. संगम लाल पांडेय के दर्शन क्षेत्र के विविध फलकों को जानने का सार्थक प्रयास है। उनका वेदांत आचार्य शंकर का अंधानुकरण न होकर वेदांत दर्शन का विवेकायुक्त सृजन है।
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मुख्य वक्ता इविवि के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. एसके सेठ ने कहा कि प्रो. पांडेय को अध्ययन क्षेत्र इतना व्यापक है कि इसका संक्षेपण संभव नहीं है। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष प्रो. आरसी सिन्हा ने कहा कि प्रो. पांडेय का वेदांत के समाज दर्शन पर महत्वपूर्ण कार्य एवं योगदान है। अतिथियों का स्वागत कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने किया। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. अमिता पांडेय ने प्रो. संगम लाल पांडेय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष आरके श्रीवास्तव ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
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