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प्रयागराज: ट्रांसफर-पोस्टिंग की पहली सूची से ही रडार पर आ गए थे एसएसपी
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Prayagraj: SSP came on radar from the first list of transfer-posting
निवर्तमान एसएसपी अभिषेक दीक्षित पर कार्रवाई भले ही कई दिन बाद हुई हो लेकिन शासन के रडार पर वह करीब डेढ़ महीने पहले ही आ गए थे। ट्रांसफर-पोस्टिंग की पहली सूची निकालने के बाद ही इस पर आपत्ति उठने लगी थी जिसके संबंध में उच्चाधिकारियों के साथ ही शासन तक शिकायतें भी पहुंचीं। आरोप लगा था कि उन्होंने कई दागियों को भी मलाईदार जगहों पर तैनात कर दिया।
एसएसपी की ओर से तैनाती के करीब एक महीने बाद पुलिस चौकियों में तेनाती की पहली सूची जारी की गई। इसमें कुल 50 दरोगाओं के नाम थे। खास बात यह कि इनमें से कई ऐसे थे जिनको दागी होने के बाद भी मलाईदार जगहों पर तैनाती दी गई।
तो कई ऐसे भी थे जिन्हें कोरोना काल में जीतोड़ मेहनत के बावजूद हटा दिया गया। कुछ ऐसे भी रहे जिनका पिछला रिकॉर्ड देखे बिना ही कम महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया।
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इस सूची के जारी होते ही तैनाती में अनियमितताओं की चर्चा आम हो गई और फिर शिकायतें पहले उच्चाधिकारियों व बाद में मुख्यालय तक बैठे अफसरों तक पहुंचीं। इसके बाद दूसरी सूची थाना प्रभारियों की जारी हुई जिसमें कुल 27 इंस्पेक्टरों व 10 सब इंस्पेक्टरों के नाम शामिल थे। इनमें से कई ऐसे इंस्पेक्टरों को प्रभारी बनाया गया जो पूर्व में गंभीर आरोपों में हटाए गए थे। इसके अलावा पांच थानों के इंस्पेक्टरों को उनकी तैनाती वाले थानेां में ही नियमित प्रभारी बना दिया गया था।
चौंकाने वाली बात यह थी कि सूची में कई दरोगाओं को भी थाने का चार्ज दिया गया था। खास बात यह रही कि दो दरोगाओं की तैनाती में कुछ घंटों बाद ही फेरबदल कर दिया गया। जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। इसके कुछ दिनों बाद ही 55 अन्य दरोगाओं को अलग-अलग थानों में तैनाती देने संबंधी आदेश जारी हुआ। जिनमें भी जमकर खेल होने की शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंचीं।
नियमों का उल्लंघन कर दी तैनाती
तैनाती में शासन के निर्देशों की अनदेखी करने की भी शिकायतें हुईं। शासन के निर्देश पर समीक्षा के लिए आए नोडल अफसर एडीजी विजिलेंस पीवी रामाशास्त्री ने भी तैनाती में शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को निर्देशित किया। इसके बावजूद लापरवाही बरती गई।
कार्रवाई के नाम पर भी की खानापूर्ति
निवर्तमान एसएसपी के बारे में यह भी शिकायतें रहीं कि कई मामलों में शिकायतें सही मिलने के बाद भी उन्होंने कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कीे। कीडगंज में अवैध वसूली में लिप्त मिलने के बावजूद छह पुलिसकर्मियों को महज थाने से हटाकर लाइन भेज दिया गया। एग्रीकल्चर चौकी में तैनात दो पुलिसकर्मियों को अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने के बाद भी केवल स्थानांतरित किया गया। सिविल लाइंस में तैनात एक दरोगा की अतीक के करीबी के साथ सांठगांठ का मामला सामने आने के बाद भी जांच बैठाने की बजाय उसे लाइन से अटैच कर दिया गया। एसओजी में तैनात कई पुलिसकर्मियों की ढेरों शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की।
लापरवाह इंस्पेक्टरों पर भी बने रहे नरम
निवर्तमान एसएसपी लापरवाही थाना प्रभारियों पर भी नरम बने रहे। कीडगंज में भाजपा नेता का मकान कब्जाने के मामले में कार्रवाई नहीं करने के बावजूद प्रभारी बने रहे। उधर करेली में जिम संचालक महिला से मारपीट में भी लापरवाही के बावजूद केवल दरोगा पर कार्रवाई हुई।
शिवकुटी में सिपाही से मारपीट के मामले में रिपोर्ट न दर्ज किए जाने को लेकर भी कोई जांच नहीं कराई गई। नौ दिन बीतने के बाद कार्रवाई की गई। इसी तरह कई अन्य मामलों में भी कार्रवाई के नाम पर हीलाहवाली की गई। कुछ मामलों में तो शिकायत पर एडीजी जोन ने मौके पर पहुंचकर जांच की और लापरवाह प्रभारी पर कार्रवाई की।
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एसएसपी की ओर से तैनाती के करीब एक महीने बाद पुलिस चौकियों में तेनाती की पहली सूची जारी की गई। इसमें कुल 50 दरोगाओं के नाम थे। खास बात यह कि इनमें से कई ऐसे थे जिनको दागी होने के बाद भी मलाईदार जगहों पर तैनाती दी गई।
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तो कई ऐसे भी थे जिन्हें कोरोना काल में जीतोड़ मेहनत के बावजूद हटा दिया गया। कुछ ऐसे भी रहे जिनका पिछला रिकॉर्ड देखे बिना ही कम महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनात किया गया।
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इस सूची के जारी होते ही तैनाती में अनियमितताओं की चर्चा आम हो गई और फिर शिकायतें पहले उच्चाधिकारियों व बाद में मुख्यालय तक बैठे अफसरों तक पहुंचीं। इसके बाद दूसरी सूची थाना प्रभारियों की जारी हुई जिसमें कुल 27 इंस्पेक्टरों व 10 सब इंस्पेक्टरों के नाम शामिल थे। इनमें से कई ऐसे इंस्पेक्टरों को प्रभारी बनाया गया जो पूर्व में गंभीर आरोपों में हटाए गए थे। इसके अलावा पांच थानों के इंस्पेक्टरों को उनकी तैनाती वाले थानेां में ही नियमित प्रभारी बना दिया गया था।
चौंकाने वाली बात यह थी कि सूची में कई दरोगाओं को भी थाने का चार्ज दिया गया था। खास बात यह रही कि दो दरोगाओं की तैनाती में कुछ घंटों बाद ही फेरबदल कर दिया गया। जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। इसके कुछ दिनों बाद ही 55 अन्य दरोगाओं को अलग-अलग थानों में तैनाती देने संबंधी आदेश जारी हुआ। जिनमें भी जमकर खेल होने की शिकायतें उच्चाधिकारियों तक पहुंचीं।
नियमों का उल्लंघन कर दी तैनाती
तैनाती में शासन के निर्देशों की अनदेखी करने की भी शिकायतें हुईं। शासन के निर्देश पर समीक्षा के लिए आए नोडल अफसर एडीजी विजिलेंस पीवी रामाशास्त्री ने भी तैनाती में शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को निर्देशित किया। इसके बावजूद लापरवाही बरती गई।
कार्रवाई के नाम पर भी की खानापूर्ति
निवर्तमान एसएसपी के बारे में यह भी शिकायतें रहीं कि कई मामलों में शिकायतें सही मिलने के बाद भी उन्होंने कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कीे। कीडगंज में अवैध वसूली में लिप्त मिलने के बावजूद छह पुलिसकर्मियों को महज थाने से हटाकर लाइन भेज दिया गया। एग्रीकल्चर चौकी में तैनात दो पुलिसकर्मियों को अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने के बाद भी केवल स्थानांतरित किया गया। सिविल लाइंस में तैनात एक दरोगा की अतीक के करीबी के साथ सांठगांठ का मामला सामने आने के बाद भी जांच बैठाने की बजाय उसे लाइन से अटैच कर दिया गया। एसओजी में तैनात कई पुलिसकर्मियों की ढेरों शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की।
लापरवाह इंस्पेक्टरों पर भी बने रहे नरम
निवर्तमान एसएसपी लापरवाही थाना प्रभारियों पर भी नरम बने रहे। कीडगंज में भाजपा नेता का मकान कब्जाने के मामले में कार्रवाई नहीं करने के बावजूद प्रभारी बने रहे। उधर करेली में जिम संचालक महिला से मारपीट में भी लापरवाही के बावजूद केवल दरोगा पर कार्रवाई हुई।
शिवकुटी में सिपाही से मारपीट के मामले में रिपोर्ट न दर्ज किए जाने को लेकर भी कोई जांच नहीं कराई गई। नौ दिन बीतने के बाद कार्रवाई की गई। इसी तरह कई अन्य मामलों में भी कार्रवाई के नाम पर हीलाहवाली की गई। कुछ मामलों में तो शिकायत पर एडीजी जोन ने मौके पर पहुंचकर जांच की और लापरवाह प्रभारी पर कार्रवाई की।