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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj: Santhosh has become the second name of a threat to traders.

प्रयागराजः व्यापारियों के लिए खौफ का दूसरा नाम बना संतोष 

Fri, 21 Jun 2019 02:32 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 Jun 2019 02:32 AM IST
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Prayagraj: Santhosh has become the second name of a threat to traders.
jhunsi - फोटो : प्रयागराज
इलाके के व्यापारियों और प्रापर्टी डीलरों के लिए शेरडीह गांव का संतोष यादव खौफ का दूसरा नाम बनता जा रहा है। बृहस्पतिवार को नगर पंचायत झूंसी में पुलिस चौकी के ठीक सामने स्थित अग्रवाल इलेक्ट्रानिक्स के मालिक विजय अग्रवाल पर दुकान के भीतर घुसकर किए गए जानलेवा हमले की कड़ी भी नैनी जेल से ही जोड़कर पुलिस देख रही है। तकरीबन एक माह पहले नैनी जेल में बंद शेरडीह गांव के शातिर अपराधी संतोष ने विजय के भतीजे रतन अग्रवाल को फोन कर रंगदारी मांगी थी। न देने पर मौत के घाट उतारने की धमकी दी गई थी। इस मामले में संतोष के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसी बीच आज की वारदात से परिवार के लोग दहल गए हैं। 
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पिछले सात माह के भीतर झूंसी के शेरडीह, पटेलनगर बाजार, सिविल लाइंस और न्यायनगर गेट के पास हुए हत्याकांडों मेें संतोष का नाम आ चुका है। लबे जीटी रोड हुई प्रापर्टी डीलर सुरेश तिवारी उर्फ बल्लू गुरू समेत छह की हत्या में संतोष यादव का नाम सामने आया था। पुलिस ने भी शूटरों को दबोचकर खुलासा किया कि तो पता चला कि संतोष ने ही भाड़े के शूटरों से इन सभी की हत्या कराई। दबी जुबान से ही सही इलाके में तो यह भी चर्चा है कि धमकी भरे फोन आने के बाद कई प्रापर्टी डीलरों और व्यापारियों ने संतोष के पास रंगदारी के पैसे भी पहुंचाए हैं। 
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शेरडीह ग्रामसभा में पिछले डेढ़ दशक से पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव उर्फ बाबा और मारे गए प्रधान योगेंद्र यादव उर्फ बच्चा के बीच दुश्मनी चल रही है। दो प्रधान परिवारों के बीच चली आ रही दुश्मनी में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जो बचे वो इन हत्याओं के आरोप में जेल में निरूद्ध है। इसी बीच तकरीबन तीन साल पहले नैनी जेल गेट के बाहर हुए शूट आउट ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया था। अंधाधुंध हुई फायरिंग और बमबारी में पूर्व प्रधान चंद्रभान यादव का छोटा बेटा ज्ञानचंद्र उर्फ वकील समेत दो मारे गए थे। इस घटना के बाद से लाशों के गिरने का दौर जो शुरू हुआ वो अब तक नहीं थमा है। पिछले साल शेरडीह गांव में अपने चाचा के दरवाजे पर खड़े वीरेंद्र उर्फ करिया को गोलियों से भून दिया गया। पूर्व ब्लाक प्रमुख रंजीत यादव टाइगर और उसके बाद दिवंगत प्रधान योगेंद्र के भतीजे पर जानलेवा हमला किया गया। 
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इसके बाद शेरडीह गांव के प्रापर्टी डीलर विद्यासागर यादव की सिविल लाइंस में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। फरवरी में पटेलनगर बाजार में राजदेव यादव की हत्या भी इसी कड़ी में शूटरों ने की। 18 अप्रैल की शाम न्यायनगर गेट के सामने मौजूद नैका-महीन गांव निवासी प्रापर्टी डीलर सुरेश तिवारी उर्फ बल्लू गुरू को गोलियों से भून दिया गया। इन सभी हत्याओं के आरोप संतोष यादव और उसके परिजनों पर ही लगे हैं। बल्लू तिवारी हत्याकांड का खुलासा तो पुलिस ने अभी कुछ रोज पहले ही किया है।

ऐसे में इलाके के प्रापर्टी डीलर और व्यापारियों के लिए खौफ का दूसरा नाम संतोष यादव बन चुका है। वह जेल के अंदर बैठकर खुलेआम रंगदारी और हत्याओं का कारोबार चला रहा है। 24 मई को उसने नगर पंचायत झूंसी के व्यापारी रतन कुमार अग्रवाल से रंगदारी मांगी थी। बकायदा मैसेज भेजकर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई। बाद में रतन की तहरीर पर पुलिस ने संतोष के खिलाफ केस दर्ज किया। इसी बीच बृहस्पतिवार को रतन के चाचा विजय अग्रवाल पर जानलेवा हमला कर दिया गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है बदमाशों ने भय पैदा करने के इरादे से विजय पर गोली चलाई। या फिर यह भी संभव है कि गफलत में विजय पर गोली चलाई गई। आज की वारदात के बाद से अग्रवाल परिवार बुरी तरह दहशत में है। 

अपने पिता के अपमान का बदला लेने की नियत से तकरीबन डेढ़ दशक पहले शेरडीह गांव के तत्कालीन प्रधान बच्चा यादव की हत्या से अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले संतोष यादव के खिलाफ अकेले झूंसी थाने में ही डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। सन् 2005 में उसने अपने भाई राजकुमार और पिता चंद्रभान के साथ मिलकर गांव के तत्तकालीन प्रधान योगेंद्र यादव उर्फ बच्चा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से अब तक संतोष पर पुलिस विभिन्न हत्याओं, हत्या के प्रयास में रासुका, आर्म्स एक्ट तथा 7 सीएलए एक्ट के तहत केस दर्ज कर चुकी है। 2013 में उसके खिलाफ कर्नलगंज थाने में आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था। 

पिछले सात माह से नैनी जेल के भीतर बैठकर लगातार संगीन अपराध को अंजाम दे रहे संतोष यादव को यहां से शिफ्ट करने के लिए झूंसी पुलिस ने तकरीबन तीन माह पहले आला अफसरों को अपनी रिपोर्ट दी थी। इसके बावजूद उसे यहां से बरेली जेल ट्रांसर्फर किए जाने का आदेश अब आया है। अगर शासन ने पहले ही संज्ञान में लिया होता तो उसके बाद की वारदातों को रोका जा सकता था। 18 अप्रैल की शाम संतोष ने जेल के भीतर से बैठकर भाड़े के शूटरों के जरिए झूंसी के प्रापर्टी डीलर सुरेश तिवारी उर्फ बल्लू की हत्या कराई थी।


इस वारदात में संतोष का नाम आते ही झूंसी पुलिस ने आला अफसरों को लिखित रिपोर्ट भेजकर उसे नैनी जेल से कहीं अन्यत्र स्थानातरित किए जाने की बात कही थी। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। दूसरी दफे जब 24 मई को कारोबारी रतन अग्रवाल से रंगदारी मांगने के मामले में संतोष का नाम सामने आया तो झूंसी पुलिस के कान एक बार फिर खड़े हुए। पुलिस सूत्रों की माने तो दोबारा झूंसी पुलिस ने आला अफसरों को रिपोर्ट भेजकर संतोष को नैनी जेल से शिफ्ट किए जाने की बात कही। बृहस्पतिवार की वारदात के बाद संतोष को यहां से बरेली जेल शिफ्ट किए जाने का शासनादेश आया है।
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