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प्रयागराजः रेती से रेती पर बनाए, पूजे पार्थिव शिवलिंग
Tue, 05 Mar 2019 12:35 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 05 Mar 2019 12:35 AM IST
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kumbh
- फोटो : kumbh
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कुंभ मेले के अंतिम और छठें स्नानपर्व महाशिवरात्रि पर संगम क्षेत्र में डुबकी लगाने के साथ ही प्रयागराज कुंभ पर्व को पूर्णता मिली। कुंभपर्व की महाशिवरात्रि को संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। पौराणिक मान्यता के अनुसार महादेव ब्रह्मांड के देव और कुंभ ब्रह्मांड का सबसे बड़ा पर्व है। ऐसे में कुंभ की महाशिवरात्रि पर डुबकी लगाने से भोलेनाथ का आशीष कई-कई गुना बढ़ जाता है। इतना ही नहीं सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन और पूजन का पुण्य मिलता है। ऐसे में हर कोई कुंभ की महाशिवरात्रि पर एक डुबकी लगाने के लिए आतुर रहा।
हर-हर महादेव के जयघोष के साथ डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने पहले जल में खड़े होकर भोलेनाथ के नाम अंजुलि में गंगाजल भर-भरकर अभिषेक किया।बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा-संगम की रेती से, रेती पर ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव स्त्रोतों एवं महामृत्युंजय मंत्र के साथ महादेव का दुग्ध से महारुद्राभिषेक किया। श्रद्धालु जिस पात्र में दुग्ध लेकर आए थे, उसी में पूजन के बाद महाशिवरात्रि पर्व का गंगाजल ले गए। पारिवारिक सुख-शांति एवं सर्वमंगल के लिए भी महाशिवरात्रि पर संगम के तट पर पूजन अनुष्ठान किए गए।
संगम में डुबकी के अतिरिक्त रेती पर महाशिवरात्रि का संकल्प लेकर रुके कल्पवासियों, संस्थाओं, श्रद्धालुओं के शिविरों में भोले के नाम की गूंज रही। डुबकी लगाकर लौटे श्रद्धालुओं के शिविरों में महारुद्राभिषेक का अनुष्ठान भोर से लेकर दोपहर तक चला। वहीं कई अन्य शिविरों में प्रदोष काल से लेकर निशीथ काल तक महारुद्राभिषेक का क्रम जारी रहा।
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शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के तुलसी मार्ग स्थित शिविर में महाशिवरात्रि पर बटुकों की उपस्थिति में सर्वमंगल की कामना के साथ महामृत्युंजय मंत्र से आहुतियां डालकर शिविर के याज्ञिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति की गई। बाद में भंडारे में फलाहार बांटा गया। वहीं गंगा सेना के शिविर में स्वामी आनंद गिरि के आचार्यत्व में ग्यारह बटुकों के साथ इक्यावन हजार महामृत्युंजय मंत्रों के साथ कुंभ के दौरान किए गए यज्ञों की पूर्णाहुति की गई। बाद में पार्थिव पूजन करके शांति और शुभता का आशीष मांगा गया।
सावन के कांवड़ियों की तरह ही महाशिवरात्रि पर डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि पर्व पर लिए गए संगम जल से ही संगम क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया। कई श्रद्धालुओं ने तो गंगाजल से भरी लुटियों का कांवड़ बनाकर संगम क्षेत्र के सभी शिवालयों में अभिषेक करके पुण्यार्जन किया। पर्व पर संगम क्षेत्र से रुदाक्ष भी खरीदा गया।
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हर-हर महादेव के जयघोष के साथ डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने पहले जल में खड़े होकर भोलेनाथ के नाम अंजुलि में गंगाजल भर-भरकर अभिषेक किया।बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा-संगम की रेती से, रेती पर ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव स्त्रोतों एवं महामृत्युंजय मंत्र के साथ महादेव का दुग्ध से महारुद्राभिषेक किया। श्रद्धालु जिस पात्र में दुग्ध लेकर आए थे, उसी में पूजन के बाद महाशिवरात्रि पर्व का गंगाजल ले गए। पारिवारिक सुख-शांति एवं सर्वमंगल के लिए भी महाशिवरात्रि पर संगम के तट पर पूजन अनुष्ठान किए गए।
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संगम में डुबकी के अतिरिक्त रेती पर महाशिवरात्रि का संकल्प लेकर रुके कल्पवासियों, संस्थाओं, श्रद्धालुओं के शिविरों में भोले के नाम की गूंज रही। डुबकी लगाकर लौटे श्रद्धालुओं के शिविरों में महारुद्राभिषेक का अनुष्ठान भोर से लेकर दोपहर तक चला। वहीं कई अन्य शिविरों में प्रदोष काल से लेकर निशीथ काल तक महारुद्राभिषेक का क्रम जारी रहा।
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शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के तुलसी मार्ग स्थित शिविर में महाशिवरात्रि पर बटुकों की उपस्थिति में सर्वमंगल की कामना के साथ महामृत्युंजय मंत्र से आहुतियां डालकर शिविर के याज्ञिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति की गई। बाद में भंडारे में फलाहार बांटा गया। वहीं गंगा सेना के शिविर में स्वामी आनंद गिरि के आचार्यत्व में ग्यारह बटुकों के साथ इक्यावन हजार महामृत्युंजय मंत्रों के साथ कुंभ के दौरान किए गए यज्ञों की पूर्णाहुति की गई। बाद में पार्थिव पूजन करके शांति और शुभता का आशीष मांगा गया।
सावन के कांवड़ियों की तरह ही महाशिवरात्रि पर डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि पर्व पर लिए गए संगम जल से ही संगम क्षेत्र के शिव मंदिरों में जलाभिषेक किया। कई श्रद्धालुओं ने तो गंगाजल से भरी लुटियों का कांवड़ बनाकर संगम क्षेत्र के सभी शिवालयों में अभिषेक करके पुण्यार्जन किया। पर्व पर संगम क्षेत्र से रुदाक्ष भी खरीदा गया।