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प्रयागराजः दूषित पानी पीते ही बीमार हुए केवी ओल्ड कैंट के बच्चे
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Prayagraj: Children of KV Old Kent, who got sick after drinking contaminated water
दूषित पानी पीते ही बीमार हुए
केवी ओल्ड कैंट के छह बच्चे
0 बच्चों के बीमार होते ही स्कूल में मचा हड़कंप, अभिभावकों ने किया हंगामा
0 बीमार बच्चों को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया, हालत सामान्य
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में दूषित पानी पीने से सातवीं कक्षा के छह बच्चे बीमार हो गए। स्कूल परिसर में लगी टंकी का पानी पीते ही बच्चे बेहोश होकर गिरने लगे। बच्चों के बीमार होने की खबर पर स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। स्कूल प्रशासन की ओर से तत्काल सभी कक्षाओं में बच्चों से टंकी का पानी पीने से मना कर दिया गया। बीमार बच्चों को तत्काल स्कूल की डिस्पेंसरी में ले जाया गया, जहां हालत गंभीर देखकर बच्चों को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां दोपहर बाद बच्चों के स्वस्थ होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
बुधवार को स्कूल में पढ़ाई हो रही थी। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि अध्यापकों ने कक्षाओं में जाकर कहा कि पानी टंकी में किसी ने कुछ मिला दिया है, इसका पानी नहीं पीना है। इधर बच्चों के बेहोश होने की बात जैसे अभिभावकों को पता चली उन्होंने स्कूल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। अभिभावकों के हंगामे पर स्थानीय शिवकुटी पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस के पहुंचने के साथ ही एंबुलेंस से सभी छह बच्चों को मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। मिलिट्री अस्पताल में पांच बच्चों को भर्ती किया गया, एक बच्चे का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया। बीमार होने वाले बच्चों में कक्षा सात-ए की मानसी, मुस्कान, हर्षिता, शैलजा, रविशंकर एवं प्रियांशु शामिल रहे।
स्कूल प्रशासन जहां शुरुआत में बच्चों के बीमार पड़ने की बात से इनकार करता रहा, लेकिन अभिभावकों एवं बच्चों की ओर से जानकारी देने के बाद स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य अंशुल प्रसाद ने स्वीकार किया कि छह बच्चे बीमार पड़े थे। उनका कहना था कि यह बच्चे घर अपने वाटर बॉटल में पानी लाए थे, उसे पीकर बीमार पड़ गए। प्रधानाचार्य के इस कथन को अभिभावक मानने को तैयार नहीं हुए। अभिभावकों और बच्चों ने बताया कि स्कूल की टंकी का पानी पीने से बच्चे बीमार पड़े न कि घर से लाई वाटर बॉटल का पानी पीने से। प्रधानाचार्य ने कहा कि बच्चों की बॉटल के पानी का सैंपल लेकर मिलिट्री अस्पताल को जांच के लिए भेज दिया गया है। बच्चों के बीमार पड़ने के बाद स्कूल प्रबंधन के लोग भी मौके पर पहुंच गए।
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केवी ओल्ड कैंट के छह बच्चे
0 बच्चों के बीमार होते ही स्कूल में मचा हड़कंप, अभिभावकों ने किया हंगामा
0 बीमार बच्चों को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया, हालत सामान्य
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में दूषित पानी पीने से सातवीं कक्षा के छह बच्चे बीमार हो गए। स्कूल परिसर में लगी टंकी का पानी पीते ही बच्चे बेहोश होकर गिरने लगे। बच्चों के बीमार होने की खबर पर स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। स्कूल प्रशासन की ओर से तत्काल सभी कक्षाओं में बच्चों से टंकी का पानी पीने से मना कर दिया गया। बीमार बच्चों को तत्काल स्कूल की डिस्पेंसरी में ले जाया गया, जहां हालत गंभीर देखकर बच्चों को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां दोपहर बाद बच्चों के स्वस्थ होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
बुधवार को स्कूल में पढ़ाई हो रही थी। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने बताया कि अध्यापकों ने कक्षाओं में जाकर कहा कि पानी टंकी में किसी ने कुछ मिला दिया है, इसका पानी नहीं पीना है। इधर बच्चों के बेहोश होने की बात जैसे अभिभावकों को पता चली उन्होंने स्कूल के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। अभिभावकों के हंगामे पर स्थानीय शिवकुटी पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस के पहुंचने के साथ ही एंबुलेंस से सभी छह बच्चों को मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। मिलिट्री अस्पताल में पांच बच्चों को भर्ती किया गया, एक बच्चे का इलाज निजी अस्पताल में कराया गया। बीमार होने वाले बच्चों में कक्षा सात-ए की मानसी, मुस्कान, हर्षिता, शैलजा, रविशंकर एवं प्रियांशु शामिल रहे।
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स्कूल प्रशासन जहां शुरुआत में बच्चों के बीमार पड़ने की बात से इनकार करता रहा, लेकिन अभिभावकों एवं बच्चों की ओर से जानकारी देने के बाद स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य अंशुल प्रसाद ने स्वीकार किया कि छह बच्चे बीमार पड़े थे। उनका कहना था कि यह बच्चे घर अपने वाटर बॉटल में पानी लाए थे, उसे पीकर बीमार पड़ गए। प्रधानाचार्य के इस कथन को अभिभावक मानने को तैयार नहीं हुए। अभिभावकों और बच्चों ने बताया कि स्कूल की टंकी का पानी पीने से बच्चे बीमार पड़े न कि घर से लाई वाटर बॉटल का पानी पीने से। प्रधानाचार्य ने कहा कि बच्चों की बॉटल के पानी का सैंपल लेकर मिलिट्री अस्पताल को जांच के लिए भेज दिया गया है। बच्चों के बीमार पड़ने के बाद स्कूल प्रबंधन के लोग भी मौके पर पहुंच गए।
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