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इलाहाबाद का नाम बदलने के खिलाफ याचिका खारिज, जानिए कोर्ट का निर्णय
Wed, 27 Nov 2019 12:29 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Wed, 27 Nov 2019 12:29 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि इसमें उठाया गया मुद्दा पहले ही एक अन्य याचिका में खारिज किया जा चुका है। ऐसे में इस मामले में आगे कार्यवाही का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी हरि शंकर पांडेय की जनहित याचिका पर दिया। इसमें याची ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया था। याची का कहना था कि यह अधिसूचना उप्र. राजस्व संहिता की धारा 6(2) में वर्णित प्रक्रिया और इसके नियमों का पालन किए बगैर जारी की गई थी, जिसे निरस्त किया जाना चाहिए।
इसका राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही और सरकारी वकील क्यूएच रिजवी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने जवाबी हलफनामे के साथ जनहित याचिका को खारिज करने की अर्जी दाखिल कर कहा कि इस मुद्दे को लेकर दायर कई याचिकाएं 26 फरवरी 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं। ऐसे में यह याचिका भी खारिज किए जाने लायक है। इस पर अदालत ने यह याचिका भी खारिज कर दी।
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न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति आलोक माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी हरि शंकर पांडेय की जनहित याचिका पर दिया। इसमें याची ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया था। याची का कहना था कि यह अधिसूचना उप्र. राजस्व संहिता की धारा 6(2) में वर्णित प्रक्रिया और इसके नियमों का पालन किए बगैर जारी की गई थी, जिसे निरस्त किया जाना चाहिए।
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इसका राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही और सरकारी वकील क्यूएच रिजवी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने जवाबी हलफनामे के साथ जनहित याचिका को खारिज करने की अर्जी दाखिल कर कहा कि इस मुद्दे को लेकर दायर कई याचिकाएं 26 फरवरी 2019 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज हो चुकी हैं। ऐसे में यह याचिका भी खारिज किए जाने लायक है। इस पर अदालत ने यह याचिका भी खारिज कर दी।
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