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Mahakumbh : 30 में से सिर्फ एक पांटून पुल है चालू, दिनभर जाम, रेती पर लगने लगे हैं शिविर

Mon, 09 Dec 2024 12:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 09 Dec 2024 12:30 PM IST
सार

महाकुंभ में करीब 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने के अनुमान के बीच विश्व स्तरीय सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 30 पांटून पुल बनाए जा रहे हैं। इसमें से मात्र एक पांटून पुल ओल्ड जीटी तैयार हो सका है। लेकिन, इस पर दिनभर जाम लोग परेशान रहते हैं।

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Only one pontoon bridge out of 30 is operational, jam all day long, camps are being set up on the sand.
महाकुंभ में तैयार किया जा रहा पांटून पुल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ के प्रथम मुख्य स्नान पर्व को अब सिर्फ एक महीने चार दिन ही शेष रह गए हैं। 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के प्रथम स्नान पर्व से महाकुंभ का आगाज होगा। लेकिन, अभी तैयारियों के नाम पर अभी जमीन पर कुछ भी नहीं आ सका है। 30 में से सिर्फ एक पांटून पुल चालू हो सका है। वहीं, मेला क्षेत्र में चकर्ड प्लेट की एक भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। जबकि, अखाड़ों के अलावा दंडीवाड़ा, आचार्यवाड़ा के संत रेती पर शिविर लगाने पहुंच चुके हैं।

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महाकुंभ में करीब 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने के अनुमान के बीच विश्व स्तरीय सुविधाओं के दावे किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 30 पांटून पुल बनाए जा रहे हैं। इसमें से मात्र एक पांटून पुल ओल्ड जीटी तैयार हो सका है। लेकिन, इस पर दिनभर जाम लोग परेशान रहते हैं। आसपास कोई दूसरा पांटून पुल चालू न होने से संत-महात्मा और संस्था लगाने वाले ओल्ड जीटी रोड से ही आने - जाने को मजबूर हैं।

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दस दिसंबर तक पूरा करना है काम

पुल पर पुलिसकर्मी भी तैनात नहीं किए गए हैं। हालांकि, पावर कॉरपोरेशन, जल निगम और नगर निगम के कामों में तेजी है। लेकिन, सड़कों, पुलों का काम सुस्त होने से लोग परेशान हैं। एक दिन पहले समीक्षा के दौरान सीएम ने सभी तैयारियां 10 दिसंबर तक पूरी करने की हिदायत दे चुके हैं। पौष पूर्णिमा 13 जनवरी को है। इसी दिन से देश-विदेश के लाखों कल्पवासी संगम की रेती पर कल्पवास शुरू कर देंगे। ऐसे में बड़ी संख्या में कल्पवासी 10 जनवरी से मेला क्षेत्र में पहुंचने लगेंगे। इस बार मेला क्षेत्र को 25 सेक्टरों में 4000 हेक्टेयर में बसाया जा रहा है।

हालत यह है कि मुख्य मार्गो पर बालू डालकर समतकीकरण किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि समतलीकरण के बाद ही चकर्ड प्लेट की सड़कें बनेंगी। मेला क्षेत्र के मुख्य मार्गों में काली मार्ग, त्रिवेणी मार्ग, महावीर मार्ग, संगम लोवर मार्ग, ओल्ड जीटी रोड, मुक्ति मार्ग, हरिश्चंद्र मार्ग, नागवासुकि मार्ग, शंकराचार्य मार्ग, हर्षवर्धन मार्ग सहित अन्य प्रमुख मार्गों का निर्माण होना बाकी है।

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कच्छप गति से चल रही है तैयारी

अखिल भारतीय दण्डी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महराज बताते हैं कि तैयारियां बहुत पीछे हैं। संस्थाओं के शिविर लगने से पहले सड़क, बिजली, पानी की व्यवस्था हो जानी चाहिए थी। लेकिन, इस बार एक ही पांटून पुल अभी तक चालू होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। इसी तरह स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य महराज का कहना है कि मेला क्षेत्र में चकर्ड प्लेट सड़क, पांटून पुल न बन पाने से शिविर लगाने वाले संतों और संस्था के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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