प्रयागराज : कोरोना काल से बाहर नहीं आ सका एनसीएलटी, अब भी हो रही वर्चुअल सुनवाई
ऑनलाइन सुनवाई के लिए ढाई से चार बजे तक का समय तय किया गया है। समय कम होने से केसों की सुनवाई भी नहीं हो पा रही है। इलाहाबाद कंपनी अधीकरण में तकरीबन डेढ़ हजार से अधिक केस लंबित हैं। यहां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के केस का बोझ है।
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कोरोना के दौर से निकलने के बाद जहां अब जगह सामान्य ढंग से कामकाज हो रहा है, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में भी फिजिकल सुनवाई हो रही है। वहीं, नेशनल कंपनी लॉ अधीकरण (एनसीएलटी) में अब भी वर्चुअल सुनवाई चल रही है। अधीकरण से जुड़े अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार फिजिकल सुनवाई के लिए ज्ञापन सौंपा है लेकिन कुछ नहीं हुआ।
अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उस पर अभी फैसला आना बाकी है। नेशनल कंपनी विधि अपील अधीकरण बार एसोसिएशन इलाहाबाद के अध्यक्ष उदय चंदानी कहते हैं कि वर्चुअल सुनवाई 2020 से लगातार होती चली आ रही है। वह भी चंडीगढ़ अधीकरण के न्यायिक सदस्य द्वारा की जा रही है।
ऑनलाइन सुनवाई के लिए ढाई से चार बजे तक का समय तय किया गया है। समय कम होने से केसों की सुनवाई भी नहीं हो पा रही है। इलाहाबाद कंपनी अधीकरण में तकरीबन डेढ़ हजार से अधिक केस लंबित हैं। यहां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के केस का बोझ है।
अध्यक्ष कहते हैं कि यहां न्यायिक सदस्य भी नहीं नियुक्ति किए गए हैं। वादों की सुनवाई के लिए यहां दो पद सृजित किए गए हैं। इस समय दोनों पद खाली हैं। सदस्यों की नियुक्ति भी नहीं हो रही है। इस वजह से यहां केसों की सुनवाई लटक रही है। अध्यक्ष कहते हैं कि इस संबंध में केंद्रीय विधि मंत्रालय, कंपनी विधि अपील अधीकरण बार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई लोगों को भेजा गया है लेकिन कुछ हुआ नहीं है। ऐसे में वादों की सुनवाई पर असर पड़ रहा है।