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अकेले रवाना हुए मो. अजीज, नहीं आए घरवाले
Fri, 21 Jun 2019 02:15 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Jun 2019 02:15 AM IST
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aziz
- फोटो : प्रयागराज
राम जन्मभूमि विस्फोट कांड में साक्ष्य के अभाव में बरी हुए जम्मू निवासी मो. अजीज 14 साल बाद जेल से रिहा होकर बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे नैनी जेल से रवाना हो गए। उन्हें बम्हरौली एयरपोर्ट ले जाया गया और वहां से दोपहर में 12.30 बजे की फ्लाइट से दिल्ली भेज दिया गया। 1.35 बजे वह दिल्ली पहुंच गए। वहां उनके परिजन आए और अपने साथ लेकर चले गए। हालांकि उन्हें लेने के लिए प्रयागराज कोई क्यों नहीं आया। उनके यहां से जाने के दौरान किसी अपने का साथ न होना सिर्फ मो. अजीज ही नहीं, अन्य लोगों को भी खटक रहा था।
बुधवार शाम अमर उजाला से बातचीत में मो. अजीज ने बताया था कि वो 14 साल जेल में रहे लेकिन, उनके बड़े बेटे जफर के अलावा उनसे मिलने कोई नहीं आया। वह भी इस बार करीब डेढ़ साल से नहीं आया था। पत्नी, छोटा बेटा और बेटी के अलावा भाई तो कभी आया ही नहीं। जिसकी वजह उन्होंने दूरी बताई थी। अजीज के अनुसार प्रयागराज से जम्मू का सफर करीब 1700 से 1800 किमी है। इतनी दूर का सफर और उसमें होने वाले खर्च को वहन करने की हैसियत उनके परिवार की नहीं थी और न है। बुधवार की शाम को वह रिहा होकर बाहर बैठे थे लेकिन, उनके परिवार का कोई भी सदस्य उन्हें लेने नहीं आ पाया था, इसीलिए वह मायूस थे। जेल से बुधवार की शाम को बाहर निकले मो. अजीज से पहरे पर तैनात सिपाही से लेकर वहां जेल के अन्य कर्मियों ने बातचीत की और सबका उनसे एक ही सवाल था, कि आखिर आपके घर के लोग क्यों नहीं आए।
नैनी। 14 बरस नैनी सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे बिताने वाले मो. अजीज ने बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े आठ बजे जाने से पहले ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करना नहीं भूले। सुबह पांच बजे की नमाज पढ़ने के बाद वह तैयार हो गए थे। जाते समय उन्होंने बताया कि उन्हें शुरू से यकीन था कि वह बेगुनाह हैं, क्योंकि पुलिस ने जिस उनकी जिस आईडी पर सिम लेने की बात सबूत पेश किया था, उसमें उनका कोई दस्तखत नहीं था। सिर्फ आईडी थी, जिसमें नाम, वल्दियत एवं पता लिखा था। उन्होंने बताया कि कोर्ट में भी जज साहब ने सरकारी वकील से यही सवाल किया था कि क्या इस आईडी में मो. अजीज के हस्ताक्षर हैं। सरकारी वकील का जवाब न था। बस उसी आधार पर जज साहब ने दोषमुक्त कर दिया।
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बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे अजीज को एक दारोगा और दो सिपाहियों के साथ पुलिस जीप से बम्हरौली एयरपोर्ट भेज दिया गया। उन्हें लेने के लिए उनके घर का कोई सदस्य नहीं आया था। यह से जाने की व्यवस्था उनके वकीलों ने की थी।
एच बी सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, केंद्रीय कारागार, नैनी, प्रयागराज।
जेल से सुबह मो. अजीज को पुलिस सिक्योरिटी में बम्हरौली भेज दिया गया। वहां पर दोपहर में 12.30 बजे की दिल्ली की फ्लाइट थी। कुछ कागजी प्रक्रिया थी, जिसे पूरा करने में समय लगता, इसलिए थोड़ा पहले भेजा गया था। दिल्ली एयरपोर्ट पर 1.30 बजे फ्लाइट पहुंचनी थी। वहीं पर उनके परिजनों को आना था। पुलिस सिक्योरिटी सिर्फ बम्हरौली तक के लिए थी। उनके साथ दिल्ली तक कोई पुलिस कर्मी नहीं गया है।
आशुतोष द्विवेदी, एसपी प्रोटोकाल, प्रयागराज।
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बुधवार शाम अमर उजाला से बातचीत में मो. अजीज ने बताया था कि वो 14 साल जेल में रहे लेकिन, उनके बड़े बेटे जफर के अलावा उनसे मिलने कोई नहीं आया। वह भी इस बार करीब डेढ़ साल से नहीं आया था। पत्नी, छोटा बेटा और बेटी के अलावा भाई तो कभी आया ही नहीं। जिसकी वजह उन्होंने दूरी बताई थी। अजीज के अनुसार प्रयागराज से जम्मू का सफर करीब 1700 से 1800 किमी है। इतनी दूर का सफर और उसमें होने वाले खर्च को वहन करने की हैसियत उनके परिवार की नहीं थी और न है। बुधवार की शाम को वह रिहा होकर बाहर बैठे थे लेकिन, उनके परिवार का कोई भी सदस्य उन्हें लेने नहीं आ पाया था, इसीलिए वह मायूस थे। जेल से बुधवार की शाम को बाहर निकले मो. अजीज से पहरे पर तैनात सिपाही से लेकर वहां जेल के अन्य कर्मियों ने बातचीत की और सबका उनसे एक ही सवाल था, कि आखिर आपके घर के लोग क्यों नहीं आए।
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नैनी। 14 बरस नैनी सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे बिताने वाले मो. अजीज ने बृहस्पतिवार को सुबह साढ़े आठ बजे जाने से पहले ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करना नहीं भूले। सुबह पांच बजे की नमाज पढ़ने के बाद वह तैयार हो गए थे। जाते समय उन्होंने बताया कि उन्हें शुरू से यकीन था कि वह बेगुनाह हैं, क्योंकि पुलिस ने जिस उनकी जिस आईडी पर सिम लेने की बात सबूत पेश किया था, उसमें उनका कोई दस्तखत नहीं था। सिर्फ आईडी थी, जिसमें नाम, वल्दियत एवं पता लिखा था। उन्होंने बताया कि कोर्ट में भी जज साहब ने सरकारी वकील से यही सवाल किया था कि क्या इस आईडी में मो. अजीज के हस्ताक्षर हैं। सरकारी वकील का जवाब न था। बस उसी आधार पर जज साहब ने दोषमुक्त कर दिया।
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बृहस्पतिवार सुबह 8.30 बजे अजीज को एक दारोगा और दो सिपाहियों के साथ पुलिस जीप से बम्हरौली एयरपोर्ट भेज दिया गया। उन्हें लेने के लिए उनके घर का कोई सदस्य नहीं आया था। यह से जाने की व्यवस्था उनके वकीलों ने की थी।
एच बी सिंह, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, केंद्रीय कारागार, नैनी, प्रयागराज।
जेल से सुबह मो. अजीज को पुलिस सिक्योरिटी में बम्हरौली भेज दिया गया। वहां पर दोपहर में 12.30 बजे की दिल्ली की फ्लाइट थी। कुछ कागजी प्रक्रिया थी, जिसे पूरा करने में समय लगता, इसलिए थोड़ा पहले भेजा गया था। दिल्ली एयरपोर्ट पर 1.30 बजे फ्लाइट पहुंचनी थी। वहीं पर उनके परिजनों को आना था। पुलिस सिक्योरिटी सिर्फ बम्हरौली तक के लिए थी। उनके साथ दिल्ली तक कोई पुलिस कर्मी नहीं गया है।
आशुतोष द्विवेदी, एसपी प्रोटोकाल, प्रयागराज।