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खाली बालियां देख लगा सदमा, खेत में ही निकला दम
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sun, 19 Apr 2015 12:00 AM IST
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सदमे से किसानों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। सदमा लगने से चार और किसानों की मौत के मामले सामने आए हैं। गेहूं की कम पैदावार देख हंडिया में एक किसान को इस कदर सदमा लगा कि खेत में ही उसकी जान निकल गई। गेहूं की खेती के लिए किसान ने कर्ज लेकर नलकूप लगवाया था। उसकी मौत के बाद घर पर गांव वालों को मजमा लगा गया। शाम को किसान का अंतिम संस्कार किया गया। तहसील प्रशासन को घटना की सूचना दी गई लेकिन मौके पर कोई अफसर नहीं पहुंचा। वहीं, मेजा, बारा और फूलपुर में भी फसल डूब जाने के सदम से तीनों किसानों की जान निकल गई।
हंडिया तहसील के बेलहा सिंहा मऊ गांव के किसान परमानंद मिश्र उर्फ कल्लन (58) के पास तकरीबन 14 बीघा खेत है। निजी नलकूप की बोरिंग ध्वस्त हो गई सो किसान ने साहूकार से कर्ज लेकर नया नलकूप लगवाया। गेहूं की फसल तैयार हुई तो किसान ने कटाई का काम शुरू करा दिया। शनिवार दोपहर किसान खेत में पहुंचा और वहां गेहूं की खाली बालियां देख सन्न रह गया। घर लौटते वक्त रास्ते में मेड़ के पास गांव के कुछ किसान बैठे दिखे तो परमानंद उनके पास चला गया और बोला, ‘गेहूं की यह हालत है। साहूकार से कर्ज लेकर नलकूप लगवाया। कल बिजली का बिल भी आ गया। पैसे का इंतजाम कहां से होगा। लगता है जान निकल जाएगी।’ यह बोलते ही उसके सीने में तेज दर्द हुआ और वह गश खाकर गिर पड़ा। मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया।
उधर, कुछ दिनों पहले हुई बारिश के कारण पानी में गेहूं की फसल डूब जाने से मेजा तहसील में रामनगर गांव के किसान रमाशंकर श्रीवास्तव को ऐसा सदमा लगा कि उन्हें हार्टअटैक हो गया। परिजनों ने उन्हें इलाहाबाद शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शुक्रवार देर रात उनकी मौत हो गई। आंधी-पानी के कारण हुई फसल की बर्बादी के सदमे से फूलपुर तहसील में भी एक महिला किसान की मौत हो गई। कसेरुआ कला गांव की महिला किसान रामरती कुशवाहा के पास सवा बीघा खेत है। पति का देहांत हो चुका है और चार बच्चों को पालन-पोषण खेत में हुई उपज पर निर्भर करता था। रामरती शनिवार सुबह खेत में पहुंची तो गेहूं की बेहद कम पैदावार देख सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। घर पहुंचते ही बेहोश हो गई। उसे एसआरएन अस्पताल लगाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, बारा तहसील में जूही गांव के किसान सूर्यबली प्रजापति (55) को फसल काटते वक्त दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। सूर्यबली के पास एक बीघा खेत हैं और उसमें एक क्विंटल गेहूं की पैदावार भी नहीं हुई।
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हंडिया तहसील के बेलहा सिंहा मऊ गांव के किसान परमानंद मिश्र उर्फ कल्लन (58) के पास तकरीबन 14 बीघा खेत है। निजी नलकूप की बोरिंग ध्वस्त हो गई सो किसान ने साहूकार से कर्ज लेकर नया नलकूप लगवाया। गेहूं की फसल तैयार हुई तो किसान ने कटाई का काम शुरू करा दिया। शनिवार दोपहर किसान खेत में पहुंचा और वहां गेहूं की खाली बालियां देख सन्न रह गया। घर लौटते वक्त रास्ते में मेड़ के पास गांव के कुछ किसान बैठे दिखे तो परमानंद उनके पास चला गया और बोला, ‘गेहूं की यह हालत है। साहूकार से कर्ज लेकर नलकूप लगवाया। कल बिजली का बिल भी आ गया। पैसे का इंतजाम कहां से होगा। लगता है जान निकल जाएगी।’ यह बोलते ही उसके सीने में तेज दर्द हुआ और वह गश खाकर गिर पड़ा। मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया।
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उधर, कुछ दिनों पहले हुई बारिश के कारण पानी में गेहूं की फसल डूब जाने से मेजा तहसील में रामनगर गांव के किसान रमाशंकर श्रीवास्तव को ऐसा सदमा लगा कि उन्हें हार्टअटैक हो गया। परिजनों ने उन्हें इलाहाबाद शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शुक्रवार देर रात उनकी मौत हो गई। आंधी-पानी के कारण हुई फसल की बर्बादी के सदमे से फूलपुर तहसील में भी एक महिला किसान की मौत हो गई। कसेरुआ कला गांव की महिला किसान रामरती कुशवाहा के पास सवा बीघा खेत है। पति का देहांत हो चुका है और चार बच्चों को पालन-पोषण खेत में हुई उपज पर निर्भर करता था। रामरती शनिवार सुबह खेत में पहुंची तो गेहूं की बेहद कम पैदावार देख सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी। घर पहुंचते ही बेहोश हो गई। उसे एसआरएन अस्पताल लगाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, बारा तहसील में जूही गांव के किसान सूर्यबली प्रजापति (55) को फसल काटते वक्त दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। सूर्यबली के पास एक बीघा खेत हैं और उसमें एक क्विंटल गेहूं की पैदावार भी नहीं हुई।
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