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सियासी हलचल: सोनेलाल पटेल की कर्मभूमि पर पत्नी ने लिया ये बड़ा फैसला, सपा की बढ़ीं मुश्किलें
Thu, 21 Mar 2024 02:38 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 21 Mar 2024 02:38 PM IST
सार
सोनेलाल पटेल की कर्मभूमि पर पत्नी ने दावा ठोक कर सपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रयागराज मंडल की फूलपुर और कौशाम्बी लोकसभा सीटों पर मतों के बंटवारे का भाजपा को लाभ होगा।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अपना दल के संस्थापक स्व. डॉ. सोनेलाल पटेल की कर्मभूमि रही फूलपुर और पड़ोसी कौशाम्बी लोकसभा सीट से अपना दल कमेरावादी के प्रत्याशी उतारने की घोषणा से समाजवादी पार्टी के नेताओं को बड़ा झटका लग सकता है। इससे इंडिया गठबंधन के मतों का बिखराव होगा और सीधा फायदा भाजपा को ही मिलना है। वैसे, इन दोनों सीटों पर फिलहाल भाजपा ही काबिज है।
बसपा से अलग होकर 1995 में अपना दल गठित करके डॉ. सोने लाल पटेल ने फूलपुर को ही कर्मस्थली बनाया था। यहीं से वह 1996 से 2009 तक पांच बार लोकसभा चुनाव लड़े, पर जीत नहीं पाए। पहली बार सिर्फ 2426 वोट ही पा सके थे। धीरे-धीरे पकड़ मजबूत हुई और 1998 के चुनाव में उन्हें 42152, फिर 1999 में 127780 मत हासिल हुए।
वहीं, 2004 में 80388 तो 2009 में 76699 मत प्राप्त हुए थे। वर्ष 2009 में कानपुर में एक सड़क हादसे में निधन के बाद पार्टी की कमान पत्नी कृष्णा पटेल के हाथों में आ गई। बड़ी बेटी पल्लवी पटेल और छोटी अनुप्रिया पटेल भी साथ थीं। 2014 में भाजपा से गठबंधन के बाद अनुप्रिया न सिर्फ मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं, बल्कि केंद्र में मंत्री पद से भी नवाजी गईं।
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फिर, सियासी महत्वाकांक्षाओं की रस्साकशी शुरू हुई और दोनों बेटियों की राहें जुदा हो गईं। मां के साथ बड़ी बहन पल्लवी पटेल हैं। उनके अपना दल कमेरावादी ने 2019 में कांग्रेस से गठबंधन किया। पल्लवी के पति पंकज पटेल निरंजन फूलपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। उन्हें सिर्फ 3.35 प्रतिशत वोट नसीब हुए। बताते हैं कि इस बार कृष्णा पटेल खुद चुनाव लड़ना चाहती हैं।
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बसपा से अलग होकर 1995 में अपना दल गठित करके डॉ. सोने लाल पटेल ने फूलपुर को ही कर्मस्थली बनाया था। यहीं से वह 1996 से 2009 तक पांच बार लोकसभा चुनाव लड़े, पर जीत नहीं पाए। पहली बार सिर्फ 2426 वोट ही पा सके थे। धीरे-धीरे पकड़ मजबूत हुई और 1998 के चुनाव में उन्हें 42152, फिर 1999 में 127780 मत हासिल हुए।
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वहीं, 2004 में 80388 तो 2009 में 76699 मत प्राप्त हुए थे। वर्ष 2009 में कानपुर में एक सड़क हादसे में निधन के बाद पार्टी की कमान पत्नी कृष्णा पटेल के हाथों में आ गई। बड़ी बेटी पल्लवी पटेल और छोटी अनुप्रिया पटेल भी साथ थीं। 2014 में भाजपा से गठबंधन के बाद अनुप्रिया न सिर्फ मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं, बल्कि केंद्र में मंत्री पद से भी नवाजी गईं।
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फिर, सियासी महत्वाकांक्षाओं की रस्साकशी शुरू हुई और दोनों बेटियों की राहें जुदा हो गईं। मां के साथ बड़ी बहन पल्लवी पटेल हैं। उनके अपना दल कमेरावादी ने 2019 में कांग्रेस से गठबंधन किया। पल्लवी के पति पंकज पटेल निरंजन फूलपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े। उन्हें सिर्फ 3.35 प्रतिशत वोट नसीब हुए। बताते हैं कि इस बार कृष्णा पटेल खुद चुनाव लड़ना चाहती हैं।
पटेल बाहुल्य सीट है फूलपुर
करीब 20.47 लाख वोटर वाली फूलपुर सीट पर सर्वाधिक चार लाख पटेल मतदाता हैं। कृष्णा पटेल कुर्मियों के साथ करीब दो लाख यादव और इतने ही मुस्लिम मतों के गठजोड़ से जिताऊ समीकरण बनते देख रही हैं। हालांकि, कागज पर दिखने वाला यह समीकरण इतना सरल भी नहीं है। अभी यहां से मजबूत सामाजिक पकड़ रखने वाली भाजपा की केशरी देवी पटेल सांसद हैं।
करीब 20.47 लाख वोटर वाली फूलपुर सीट पर सर्वाधिक चार लाख पटेल मतदाता हैं। कृष्णा पटेल कुर्मियों के साथ करीब दो लाख यादव और इतने ही मुस्लिम मतों के गठजोड़ से जिताऊ समीकरण बनते देख रही हैं। हालांकि, कागज पर दिखने वाला यह समीकरण इतना सरल भी नहीं है। अभी यहां से मजबूत सामाजिक पकड़ रखने वाली भाजपा की केशरी देवी पटेल सांसद हैं।
इन्हें आजादी के बाद अब तक हुए चुनावों में से सबसे ज्यादा (5.44 लाख) वोट हासिल हुए हैं। वहीं, सियासी गलियारों में यह भी जोरदार चर्चा है कि अनुप्रिया ने भाजपा से फूलपुर सीट भी मांगी है।हालांकि, भाजपा ने अभी न प्रत्याशी घोषित किया, न ही सीट पर स्थिति स्पष्ट की है। अगर कृष्णा पटेल यहां से अकेले चुनाव लड़ती हैं तो सपा प्रत्याशी को ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कौशाम्बी की तीन सीटों पर सपा का कब्जा
कौशाम्बी लोकसभा सीट (सुरक्षित) पर कौशाम्बी जिले की तीनों विस सीटों पर सपा का कब्जा है, जबकि प्रतापगढ़ की दो विधानसभा क्षेत्र (कुंडा व बाबागंज) राजा भैया के जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के पास हैं।
कौशाम्बी लोकसभा सीट (सुरक्षित) पर कौशाम्बी जिले की तीनों विस सीटों पर सपा का कब्जा है, जबकि प्रतापगढ़ की दो विधानसभा क्षेत्र (कुंडा व बाबागंज) राजा भैया के जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के पास हैं।
सिराथू से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराकर अपना दल कमेरावादी की राष्ट्रीय महासचिव पल्लवी पटेल ही विधायक बनी हैं। कौशाम्बी और प्रतापगढ़ में भी पटेल मतों की संख्या ठीक-ठाक है। ऐसे में वह कौशाम्बी से अपना प्रत्याशी उतारने पर अड़ी रहती हैं तो सीधा नुकसान सपा को ही होगा।
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