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दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या के  दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा बरकरार 

Fri, 02 Jul 2021 07:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 02 Jul 2021 07:57 PM IST
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Life sentence for two accused of murder upheld
allahabad high court - फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नवंबर 2007 में दिन दहाड़े मथुरा के हाईवे थाना क्षेत्र में घेर कर कमल सिंह की गोली मारकर हत्या करने के  आरोपियों को दोषी करार दिया है और सत्र न्यायालय मथुरा द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को सही करार देते हुए पुष्टि कर दी है। हाईकोर्ट ने अपने 58 पृष्ठ के फैसले में कहा कि अभियोजन बिना संदेह के अपराध साबित करने में कामयाब रहा है।घटना के समय दो चश्मदीद गवाहों की मौजूदगी और उनके विश्वसनीय बयान आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त है।अपीलार्थियों की तरफ से इन गवाहों से सवाल भी नहीं पूछे गए। हत्या के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है।
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दो आरोपियों को सत्र न्यायालय द्वारा बरी करने के आधार पर इन्हे भी बरी करने की मांग  स्वीकार्य नहीं है। अपराध में दोनों की भूमिकाएं अलग हैं। इसलिए इसका लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि विवेचना में कुछ छूट जाने मात्र से अभियोजन की कहानी गलत नहीं मानी जा सकती यदि घटना के अन्य साक्ष्य मौजूद हों।कोर्ट ने सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति बच्चूलाल तथा न्यायमूर्ति एस के पचौरी की खंडपीठ ने जगदीश व मनोज कुमार की आपराधिक अपीलों पर दिया है।
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घटनाक्रम के अनुसार मंगल सिंह का बेटा कमल सिंह खेत सींच कर वापस आ रहा था कि प्रेम सिंह के खेत में आरोपियों ने उसे घेर लिया ।और  गोली मारकर हत्या कर दी। प्रेम सिंह के ट्यूबवेल पर मौजूद पिता मंगल सिंह व लखन गोली की आवाज सुन दौडे। अन्य लोग भी आए। आरोपी भाग खड़े हुए। अपीलार्थियों का कहना था मौके से खाली कारतूस बरामद नहीं किया।जो असलहा बरामद किया उसका प्रयोग हत्या में नहीं हुआ था।
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कोर्ट ने कहा  अभियोजन के संदेह से परे साक्ष्य व चश्मदीद गवाहों के बयान , मेडिकल जांच रिपोर्ट अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त है।विवेचक की गलती के आधार पर  इसे झुठलाया नहीं जा सकता।घटना 10नवंबर 07 की सुबह साढ़े दस बजे की है।और एक घंटे में एफ आई आर दर्ज करा दी गई।सत्र न्यायालय ने  अपीलार्थियों  को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास  व  बीस हजार रूपए जुर्माने की सजा सुनाई।हाईकोर्ट ने सजा को सही ठहराया है।
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