आखिरी स्नान के साथ कुंभ ने ली विदाई, महाशिवरात्रि पर 1.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम के आखिरी पर्व महाशिवरात्रि पर अमृत रूपी कुंभ में आस-विश्वास और भरोसे की अनगिनत बूंदें समाईं। आठ किमी लंबे संगम के दोनों किनारों पर भक्तिभाव के सागर में भीगने से कोई भी नहीं बच सका। कुंभ के 32सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली चकर्ड प्लेट की सड़कों पर गठरी लिए आस्थावानों की कतारें चौतरफा दिखीं। हर तरफ आस्था का जन ज्वार उमड़ा। कुंभ मेला प्रशासन के मुताबिक देर शाम तक 1.10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। इसी के साथ दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ अगले छह वर्ष के लिए विदा हो गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को कुंभ के समापन की औपचारिक घोषणा करेंगे। रविवार की रात 1:26 बजे महाशिवरात्रि लगने के साथ ही संगम तट के घाटों पर घंटों से इंतजार में खड़े श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाने लगे। इस बार भी भीड़ प्रबंधन को देखते हुए आठ से 10 किमी पहले ही बैरीकेडिंग लगाकर वाहनों का प्रवेश रोक दिए जाने से श्रद्धालुओं पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ी। दिल्ली, पटना, जयपुर, ग्वालियर, रांची, धनबाद, नागपुर, चेन्नई, विशाखापत्तनम समेत देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालु संगम की दूरी पूछते आगे बढ़ते रहे। किसी के चेहरे पर न थकान थी न किसी तरह की चिंता। हर मन में संगम में डुबकी लगाकर जीवन धन्य बनाने की आतुरता थी। त्रिवेणी मार्ग पर आस्था का जन समुद्र हिलोरें मारता रहा।
इस सड़क पर पैदल चलने में भी लोग पसीने-पसीने होते रहे। इसी तरह काली सड़क और लाल सड़क पर भी भीड़ ठेलमठेल धक्कामुक्की करते हुए संगम की ओर बढ़ी। लोग एक दूसरे हाथ पकड़े बढ़ते रहे। कोई गमछा पकड़ कर चल रहा था तो कोई झंडा लेकर। महाशिवरात्रि पर सोमवार के संयोग की वजह से संगम पर स्नान के साथ ही दीपदान, पूजा, अर्घ्य और आरती की भी होड़ मची रही। सुरक्षित स्नान के लिए मेला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे। इस दौरान घाटों पर हर हर गंगे और हर हर महादेव के जयकारे गूंज रहे थे।
मुख्य बातें:-
-8 किमी लंबे संगम तट पर रविवार की आधी रात से सोमवार की शाम तक श्रद्धालुओं ने किया लगातार स्नान
-40 घाटों पर देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने लगाई अंतिम स्नान पर्व पर डुबकी