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हाईकोर्ट ने कहा : दुष्कर्म पीड़िता को नाबालिग साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी, ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर

Fri, 12 Jul 2024 11:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 12 Jul 2024 11:19 AM IST
सार

मामला फिरोजाबाद के रामगढ़ थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2022 में पीड़िता के परिजनों ने आरोपी मोहित कुमार पर बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। दावा किया था की पीड़िता की उम्र 15 वर्ष थी।

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It is the responsibility of the prosecution to prove that the rape victim is a minor, seal the decision of the
अदालत (सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग प्रेमिका से दुष्कर्म करने के आरोप से युवक को बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को नाबालिग साबित करना आरोपी की नहीं, अभियोजन की जिम्मेदारी है। यह फैसला न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से आरोपी के दोषमुक्ति के आदेश को चुनौती देने वाली अपील को खारिज करते हुए सुनाया है।

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मामला फिरोजाबाद के रामगढ़ थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2022 में पीड़िता के परिजनों ने आरोपी मोहित कुमार पर बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। दावा किया था की पीड़िता की उम्र 15 वर्ष थी।
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विवेचना और ट्रायल के दौरान पीड़िता की आयु साबित करने के लिए कक्षा चार का अंकपत्र और स्कूल का स्कॉलर रजिस्टर पेश किया गया। इसमें उसकी उम्र 15 वर्ष ही थी। कोर्ट को दिए बयान में पीड़िता ने खुद को बालिग बताया और कहा कि स्कूल में उसका दाखिल कक्षा एक में हुआ था। जबकि स्कूल की ओर से पेश स्कॉलर रजिस्टर में उसका दाखिल कक्षा चार से दर्शाया गया था।

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कोर्ट ने पाया कि आयु निर्धारण में पेश स्कूल के स्कॉलर रजिस्टर में कटिंग की गई थी। दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य में गंभीर विरोधाभास के बावजूद अभियोजन की ओर से पीड़िता की रेडियोलॉजिकल जांच भी नहीं कराई गई थी। कोर्ट ने आरोपी को बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दी।


कहा कि आपराधिक मामलों में सबूत का भार हमेशा अभियोजन पर होता है। इसलिए दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता को नाबालिग साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन की थी, न कि आरोपी की। मौजूदा मामले में अभियोजन पीड़िता को नाबालिग साबित करने में विफल रहा है। लिहाजा, ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोपी के पक्ष में पारित दोषमुक्त का आदेश बिल्कुल सही और कानूनी दृष्टि से दोषरहित है।

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