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High Court : फर्जी दस्तावेज उपलब्ध नहीं तो बर्खास्तगी अवैध, सभी सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश
Mon, 03 Aug 2026 05:44 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 03 Aug 2026 05:44 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कांस्टेबल शत्रुघ्न सिंह की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब विभाग के पास कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र और हाईस्कूल प्रमाण पत्र उपलब्ध ही नहीं हैं तो उनके आधार पर की गई विभागीय जांच और सजा पूरी तरह आधारहीन है।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के कांस्टेबल शत्रुघ्न सिंह की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब विभाग के पास कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र और हाईस्कूल प्रमाण पत्र उपलब्ध ही नहीं हैं तो उनके आधार पर की गई विभागीय जांच और सजा पूरी तरह आधारहीन है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने याचिका पर दिया है।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि शत्रुघ्न सिंह की नियुक्ति वर्ष 1977 में नियमानुसार हुई थी और करीब 20 वर्षों तक उनकी सेवा पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। वर्ष 1998 में वरिष्ठता सूची में उनका नाम गलती से अनुसूचित जाति श्रेणी में दर्ज हो गया था, जिसे उन्होंने स्वयं हलफनामा देकर सामान्य वर्ग में संशोधित कराने का अनुरोध किया और विभागीय जांच के बाद रिकॉर्ड भी ठीक कर दिया गया।
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बाद में एक गुमनाम शिकायत के आधार पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के जरिये एससी वर्ग का लाभ लेकर नौकरी हासिल की। कोर्ट ने पाया कि विभाग के पास आरोपों से संबंधित कोई मूल दस्तावेज नहीं था और न ही जांच के दौरान उनकी प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। ऐसे में पूरी विभागीय कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने बर्खास्तगी रद्द करते हुए शत्रुघ्न सिंह को सेवा में निरंतर कार्यरत मानने तथा तीन माह के भीतर बकाया वेतन, पदोन्नति, पेंशन और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया।
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