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हाईकोर्ट ने कहा : शादी का वादा शोषण के औजार के रूप में नहीं कर सकते इस्तेमाल

Wed, 04 Sep 2024 02:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 04 Sep 2024 02:40 PM IST
सार

आवेदक के वकील ने दलील दी कि सहमति से संबंध बने थे, इसलिए दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता है अभियोजन पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी ने पीड़िता का बार-बार शोषण करने के लिए शादी के वादे का इस्तेमाल एक उपकरण के रूप में किया था। जो आईपीसी की धारा 376 के तहत गलत प्रलोभन था।

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High Court said: Promise of marriage cannot be used as a tool of exploitation
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हाईकोर्ट ने शादी के झूठा वादा कर दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया है। कहा कि शादी के वादे को शोषण के साधन के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने रवि कुमार भारती उर्फ बिट्टू की अर्जी खारिज करते हुए यह आदेश दिया। गौतम बुद्ध नगर के फेज तीन थाने में जनवरी 2019 में एक महिला ने दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।

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आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे फेसबुक और व्हाट्सएप पर दोस्ती की। इसके बाद के बहाने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता को जब यह पता चला कि आरोपी दूसरी महिलाओं के साथ भी संबंध बना रहा है तो उसने विरोध किया। इस पर आरोपी ने उसे धमकाया। इसके बाद उसने आरोपी पर मुकदमा दर्ज कराया। गौतमबुद्ध नगर की सीजेएम कोर्ट ने गैर जमानती वारंट किया। इस पर आरोपी ने हाईकोर्ट में में अर्जी दाखिल कर कार्यवाही को रद्द करने की गुहार लगाई।

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आवेदक के वकील ने दलील दी कि सहमति से संबंध बने थे, इसलिए दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता है अभियोजन पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी ने पीड़िता का बार-बार शोषण करने के लिए शादी के वादे का इस्तेमाल एक उपकरण के रूप में किया था। जो आईपीसी की धारा 376 के तहत गलत प्रलोभन था। कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।

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