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High Court : रोक के बावजूद जेल भेजने पर पीड़ित को पांच लाख रुपये मुआवजे का आदेश
Mon, 01 Jun 2026 05:57 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 01 Jun 2026 05:57 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी-स्थगन आदेश की अवहेलना कर एक व्यक्ति को जेल भेजने के मामले में प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी-स्थगन आदेश की अवहेलना कर एक व्यक्ति को जेल भेजने के मामले में प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अनिल सोनी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया।
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सिद्धार्थनगर के इटवा थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने एक अप्रैल 2026 को अनिल सोनी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद भी पुलिस ने चार अप्रैल को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।
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खंडपीठ ने कहा कि आदेश की अवहेलना गंभीर मामला है। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के रुदुल शाह और नीलाबती बेहरा मामलों का हवाला देते हुए अवैध हिरासत के लिए सांविधानिक प्रतिकर देने का आधार बताया। निर्देश दिया कि मुआवजे की राशि एक माह में दी जाए। साथ ही आवश्यकता होने पर इसे संबंधित थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा से वसूला जा सकता है। एसपी को 13 जुलाई तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है।
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