{"_id":"6ade0e8377aa651e650cd5f3","slug":"high-court-if-an-allotment-is-cancelled-due-to-an-error-by-the-authority-compensation-must-be-paid-2026-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : प्राधिकरण की गलती से विज्ञापन रद्द हुआ तो आवंटी को देना होगा मुआवजा, कोर्ट ेने दिया आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : प्राधिकरण की गलती से विज्ञापन रद्द हुआ तो आवंटी को देना होगा मुआवजा, कोर्ट ेने दिया आदेश
Sun, 25 Oct 2026 07:43 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 25 Oct 2026 07:43 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्राधिकरण की अपनी गलती के कारण विज्ञापन रद्द किया जाता है और आवंटी की ओर से किसी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ है, तो प्राधिकरण को उसके निवेश की भरपाई करनी होगी।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्राधिकरण की अपनी गलती के कारण विज्ञापन रद्द किया जाता है और आवंटी की ओर से किसी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ है, तो प्राधिकरण को उसके निवेश की भरपाई करनी होगी। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के रिटेल आउटलेट की डीलरशिप के लिए चयनित व्यक्ति को 15,78,486 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण की गलती के कारण किसी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यदि चयनित व्यक्ति ने निर्धारित शर्तों को पूरा करने के लिए धन खर्च किया है। बाद में प्राधिकरण के स्तर पर हुई गलती के कारण प्रक्रिया रद्द कर दी जाती है तो उसके निवेश की भरपाई का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।
विज्ञापन
मामले के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 25 नवंबर 2018 को गाजीपुर जिले में राज्य राजमार्ग-99 पर रिटेल आउटलेट की डीलरशिप के लिए विज्ञापन जारी किया। याची ने आवेदन के साथ 10,000 रुपये जमा किए। एक फरवरी 2019 को आयोजित लॉटरी में उसका चयन हुआ। इसके बाद 2 अगस्त 2019 को जारी आशय पत्र में उसे साइट को सड़क के स्तर तक विकसित करने और 1.5 मीटर ऊंची रिटेनिंग वॉल व चारदीवारी बनाने की शर्त दी गई। पत्र में यह भी कहा गया था कि शर्तें पूरी नहीं करने पर बिना किसी पूर्व सूचना के आशय पत्र वापस लिया जा सकता है।
विज्ञापन
हालांकि, 11 मार्च 2021 को याचिकाकर्ता को सूचित किया गया कि संबंधित स्थान का आवंटन रद्द कर दिया गया। कॉर्पोरेशन की ओर से पेश वकील ने विज्ञापन की सामान्य शर्तों के खंड 14 का हवाला दिया। इसके तहत कंपनी को बिना कारण बताए अपने विवेक से विज्ञापन रद्द करने का अधिकार था।
कॉर्पोरेशन ने यह भी दलील दी कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 2(2) के तहत 6 मार्च 2018 को जारी अधिसूचना के माध्यम से संबंधित सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जा चुका था। यह अधिसूचना विज्ञापन जारी होने से पहले की थी लेकिन संबंधित स्थान के लिए विज्ञापन जारी करना त्रुटिपूर्ण था।