फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Electricity department cannot impose fine on consumer without hearing the other side

High Court : पक्ष सुने बिना उपभोक्ता पर जुर्माना नहीं थोप सकता बिजली विभाग, याची के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रव

Sun, 08 Mar 2026 03:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Mar 2026 03:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली विभाग उपभोक्ता का पक्ष सुने बिना उस पर भारी जुर्माना नहीं थोप सकता। बिजली आपूर्ति संहिता के तहत उपभोक्ता को अनंतिम निर्धारण नोटिस (प्रोविजनल असेसमेंट नोटिस) के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का पूरा अवसर मिलना अनिवार्य है।

विज्ञापन
High Court: Electricity department cannot impose fine on consumer without hearing the other side
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली विभाग उपभोक्ता का पक्ष सुने बिना उस पर भारी जुर्माना नहीं थोप सकता। बिजली आपूर्ति संहिता के तहत उपभोक्ता को अनंतिम निर्धारण नोटिस (प्रोविजनल असेसमेंट नोटिस) के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई का पूरा अवसर मिलना अनिवार्य है।

विज्ञापन


इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्रयागराज के याची जतिन कुमार मोदनवाल की याचिका निस्तारित कर दी। साथ ही तीन महीने तक याची के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। इस दौरान अधिकारियों को उपभोक्ता को सुनवाई का अवसर देते हुए उनकी आपत्तियों पर विचार करना होगा।
विज्ञापन


याची ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की 15 जुलाई 2024 की निरीक्षण रिपोर्ट और उसके आधार पर जारी 6,12,884 रुपये के भारी-भरकम प्रोविजनल असेसमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि बिजली विभाग की जांच रिपोर्ट एकतरफा थी। उसकी आपत्तियों पर विचार किए बिना ही वसूली की मांग की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर याची को चार सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत आपत्ति विभाग के समक्ष पेश करने का समय दिया है। साथ ही बिजली विभाग के अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे याची की आपत्तियों पर गौर करें, उसे व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दें और उसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लें।


कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले तीन महीने तक विभाग याची के खिलाफ किसी भी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। हालांकि, याची की वर्तमान बिलों का भुगतान नियमित रूप से करना होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed