हाईकोर्ट : पिछली भर्ती में फिट थी लंबाई व सीने की माप, दूसरी में घट गई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस कांस्टेबल और होमगार्ड भर्ती-2025 में शारीरिक मानक परीक्षण (पीएसटी) के दौरान लंबाई व सीने की माप कम पाए जाने पर अभ्यर्थियों की स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा माप कराने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस कांस्टेबल और होमगार्ड भर्ती-2025 में शारीरिक मानक परीक्षण (पीएसटी) के दौरान लंबाई व सीने की माप कम पाए जाने पर अभ्यर्थियों की स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा माप कराने का आदेश दिया है। वहीं, निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के प्रमाणपत्रों के आधार पर लंबाई को चुनौती देने वाली छह अभ्यर्थियों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने प्रयागराज के अनुज समेत कई जिलों के अभ्यर्थियों की 61 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के प्रधानाचार्य को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। चार नवंबर को सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट करनी होगी।
कोर्ट ने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों की लंबाई या सीने की माप पिछली भर्तियों में निर्धारित मानक के अनुरूप पाई गई थी। वहीं, वर्तमान चयन प्रक्रिया में उन्हें कम माप के आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया। ऐसे मामलों में स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से दोबारा माप कराने का अवसर दिया जाना उचित है।
कोर्ट ने उन मामलों में भी दोबारा माप का आदेश दिया, जिनमें पहली और अपील के बाद की गई माप में अंतर पाया गया। इसके अलावा जिन अभ्यर्थियों को अपील के अधिकार की जानकारी नहीं थी या वे 24 घंटे की निर्धारित अवधि में अपील नहीं कर सके, उन्हें भी समान राहत दी है।
31 अक्तूबर को केजीएमयू में होगी दोबारा माप
कोर्ट ने संबंधित अभ्यर्थियों को 31 अक्तूबर को सुबह 10 बजे तक केजीएमयू में उपस्थित होने का आदेश दिया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षण के लिए उन्हें पहचान पत्र, वर्तमान भर्ती परीक्षा का पीएसटी प्रवेश पत्र और आदेश की प्रमाणित प्रति साथ ले जानी होगी। परीक्षण के वक्त अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड और होमगार्ड विभाग के अधिकारियों को मौजूद रहना होगा। दोबारा माप करने वाले डॉक्टरों को पहले की माप की जानकारी नहीं दी जाएगी, ताकि जांच निष्पक्ष रहे।
निजी अस्पतालों के प्रमाणपत्र दोबारा जांच का आधार नहीं : कोर्ट
कोर्ट ने निजी अस्पताल व डॉक्टर के प्रमाणपत्र के आधार पर दोबारा माप की मांग वाली छह याचिकाएं खारिज कर दीं। साथ ही स्पष्ट किया कि निजी अस्पताल या डॉक्टर से लंबाई का प्रमाणपत्र हासिल कर लेने से दोबारा जांच का अधिकार नहीं मिल जाता। ऐसे प्रमाणपत्रों में अभ्यर्थी की पहचान सुनिश्चित होने और माप कराते समय भर्ती प्रक्रिया में दर्ज माप को चुनौती देने का उद्देश्य स्पष्ट होने की बात सामने नहीं आती।