Gyanvapi Case : वजूखाने के सर्वे मामले में सुनवाई से हटे जज, अब 31 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
ज्ञानवापी विवाद मामले में वजूखाने के सर्वे की मांग को लेकर दाखिला याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने इस मुकदमे को किसी अन्य पीठ को सुनवाई के लिए भेजने के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित किया है। मामले की अगली सुनवाई अब 31 जनवरी को होगी।
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वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर में स्थित वजूखाने के एएसआई सर्वे की मांग वाली पुनर्विचार याचिका से न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की पीठ ने अपने को सुनवाई से अलग कर लिया है। पीठ ने मामले को मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष भेजते हुए सुनवाई के लिए किसी और जज के पास भेजने का आदेश दिया है। अब मामले को दूसरी पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। याचिका पर अगली सुनवाई 31 जनवरी को होगी।
इसके पहले मामला सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया। पीठ ने मामले को पूरी तरह से सुना। इसके बाद इसे किसी दूसरी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत करने को मुख्य न्यायमूर्ति के भेज दिया। अब मुख्य न्यायमूर्ति मामले को किसी दूसरे जज को सुनवाई के लिए रेफर करेंगे। हिंदू पक्ष राखी सिंह की ओर से दाखिल पुनर्विचार याचिका में वुजूखने का सर्वे कराने की मांग से इंकार करने को चुनौती दी गई है।
वाराणसी जिला जज ने अपने 21 अक्तूबर 2023 के आदेश से मांग को खारिज कर दिया था। हिंदू पक्ष का कहना है कि वजूखाने का सर्वे होने से धार्मिक चरित्र का पता लग सकेगा, लेकिन जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए सिविल वाद को खारिज कर दिया गया था। जिला जज ने कहा है कि एएसआई को क्षेत्र का सर्वेक्षण करने का निर्देश देना उचित नहीं है। क्योंकि, इससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना होगी। जबकि, पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि वजूखाने का सर्वेक्षण न्यायहित में आवश्यक है। इससे वादी और प्रतिवादी दोनों को लाभ होगा।
वाराणसी जिला जज के आदेश को दी गई थी चुनौती
अधिवक्ता सौरभ तिवारी के माध्यम से दाखिल सिविल याचिका में वाराणसी के जिला जज के 21 अक्तूबर 2023 के आदेश को चुनौती दी गई है। हिंदू पक्षकार राखी सिंह की ओर से वाराणसी जिला अदालत में वुजुखाना के एएसआई सर्वेक्षण की मांग की गई थी। वाराणसी जिला अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। जिला जज के समक्ष दाखिल सिविल वाद में तर्क दिया गया था कि ज्ञानवापी परिसर के धार्मिक चरित्र का पता लगाने के लिए वुजुखाना (शिवलिंग को छोड़कर) का सर्वेक्षण आवश्यक है।
जिला जज ने हिंदू पक्ष की अर्जी को खारिज कर दिया। जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने अपने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई 2022 के अपने आदेश के जरिए उस क्षेत्र की विधिवत सुरक्षा करने का आदेश दिया है, जहां कथित शिवलिंग पाए जाने की बात कही गई है। इसीलिए एएसआई को क्षेत्र का सर्वेक्षण करने का निर्देश देना उचित नहीं है, क्योंकि, यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। जिला जज ने यह भी कहा है कि विशेष क्षेत्र को 2022 के मुकदमें में पारित 21 जुलाई 2022 के आदेश के तहत उनकी अदालत द्वारा आदेशित एएसआई सर्वेक्षण के दायरे से बाहर रखा गया।
अधिवक्ता ने न्यायालय में दिया तर्क
पुनर्विचार याचिका में उन्होंने जोर देकर कहा कि वजूखाने का सर्वेक्षण न्याय हित में आवश्यक है। इससे वादी और प्रतिवादियों को समान रूप से लाभ होगा और 2022 के मुकदमें में उचित निर्णय पर पहुंचने में अदालत को मदद मिलेगी। यह भी तर्क दिया गया कि जिला जज अपने 21 अक्तूबर के आदेश में वजूखाने के सर्वेक्षण के निर्देश देने के लिए कानून द्वारा निहित अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने में विफल रहे।
तर्क दिया गया है कि जिला जज ने अपने आदेश में में यह कहने की गलती कि है कि 21 जुलाई 2023 के आदेश में उसने जानबूझकर विधिवत संरक्षित क्षेत्र को सर्वेक्षण के दायरे से बाहर कर दिया, क्योंकि, जिस आवेदन पर उक्त आदेश पारित किया गया, उसमें संरक्षित क्षेत्र के सर्वेक्षण की मांग करने वाली कोई प्रार्थना नहीं थी। बता दें कि हाईकोर्ट के एक आदेश के तहत ज्ञानवापी परिसर का सर्वे हो चुका है और उस रिपोर्ट को जिला जज को सौंपा जा चुका है। यह सर्वे इस बात के लिए हुआ था कि क्या मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर की पहले से मौजूद संरचना पर किया गया है।