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Prayagraj : शुआट्स से निकाले गए 53 शिक्षकों को पुन: नियुक्त किए जाने का शासनादेश

Wed, 04 Feb 2026 04:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 04 Feb 2026 04:13 PM IST
सार

सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) में बीते एक जुलाई 2025 को वित्तीय संकट का हवाला देते हुए दस विभागों को बंद कर 53 शिक्षकों की सेवाएं का समाप्त कर दी गई थीं।

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Government order to re-appoint 53 teachers expelled from SHUATS
शुआट्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) में बीते एक जुलाई 2025 को वित्तीय संकट का हवाला देते हुए दस विभागों को बंद कर 53 शिक्षकों की सेवाएं का समाप्त कर दी गई थीं। मंगलवार को शासन ने उन 53 शिक्षकों की सेवाओं को तत्काल चालू करते हुए उन्हें भुगतान करने का आदेश दिया है।

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शुआट्स के फैसले के खिलाफ डॉ. आरती सिंह, डॉ. रेखा वर्मा, डॉ. नरगिस फातिमा व अन्य स्ववित्त पोषित शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश शासन से शिकायत दर्ज की थी।
शिकायतकर्ताओं ने विवि पर वित्तीय अनियमितता, अनुदानित पदों पर जान-पहचान के व्यक्तियों को स्ववित्तपोषित अंश से स्थानांतरित करने के आरोप भी लगाए थे। शासन ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसने अपनी रिपोर्ट में विश्वविद्यालय पर वांछित सहयोग न करने और नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का पालन न किए जाने का उल्लेख किया था।
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जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने 15 मार्च से पूर्व तैनात कुलपति सहित 36 लोगों का वेतन अनुदान जारी करने और अनियमित रूप से तैनात कुलसचिव प्रो. रानू प्रसाद, प्रति कुलपति प्रो. रितु प्रकाश दूबे सहित 26 लोगों से अनुदान वसूलने की कार्यवाही के लिए 15 दिन में स्पष्टीकरण विवि से मांगा है। अभिलेखों के अभाव में जांच न किए जाने के कारण 74 शैक्षिक एवं 86 गैर शैक्षणिक पदों पर कार्यरत लोगों का वेतन रोकने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त हटाए गए 53 शिक्षकों की बहाली के निर्देश दिए।

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विवि ने कहा- मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन

नैनी। शुआट्स मीडिया कमेटी के चेयरमैन डॉ. रमाकांत दुबे ने बताया कि 53 प्राध्यापकों को हटाए जाने के संबंध में मामला हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। कोर्ट के निर्णय के पूर्व उनकी पुनःनियुक्ति विश्वविद्यालय में किया जाना संभव नहीं है।

विश्वविद्यालय में कई विभागों में 90 प्रतिशत से अधिक सीटें रिक्त होने और गंभीर वित्तीय संकट के कारण प्रावधानित नियमों के तहत 10 विभाग को बंद कर 53 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। इन शिक्षकों के वेतन के लिए यदि उत्तर प्रदेश शासन से अनुदान स्वीकृत किया जाता है तो बंद किए गए विभागों को पुनः खोलने में कोई आपत्ति नहीं है।

उत्तर प्रदेश शासन ने शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति के संबंध में 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। सभी नियुक्तियां निर्धारित मानकों और नियमों का पालन करते हुए की गई हैं। नियुक्ति संबंधी समस्त अभिलेख एवं स्पष्टीकरण निर्धारित अवधि में शासन को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। 

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