गंगा तट को बना दिया कब्रिस्तान : झूंसी के छतनाग श्मशान घाट में रेती में दफना दिए सैकड़ों शव
- चंद पैसे बचाने को झूंसी के छतनाग गंगा घाट को लोगों ने बना दिया है कब्रिस्तान
- श्मशान घाट पर गंगा तट के किनारे दफनाई गई हैं सैकड़ों लाशें
- आस्था के नाम पर मोक्षदायिनी मां गंगा को लगातार किया जा रहा प्रदूषित
- बाढ़ आने पर गंगा तट के किनारे गाड़ी गईं लाशें उतराकर बहती हैं गंगा में
- ग्रामीणों ने प्रशासन से लाखों के दफनाने पर रोक लगाए जाने की मांग की
विस्तार
सदियों से लोगों की आस्था के रुप में पूजी जाने वाली मां गंगा का अस्तित्व झूंसी में खतरे में हैं। झूंसी के छतनाग गांव स्थित गंगा तट को लोगों ने कब्रिस्तान बना दिया है। वैसे तो छतनाग घाट को श्मशान घाट के रुप में ज्यादा मान्यता मिली हुई है लेकिन कोरोना संक्रमण में इन दिनों शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचने वाले लोग शव को बालू में दफनाकर मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। छतनाग घाट पर गंगा तट के तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी में सौ से ज्यादा लाशें दफनाई गई हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है।
आदिकाल से मां गंगा हिन्दुओं के लिए आस्था का प्रतीक रही है। मां गंगा को भारतीय संस्कृति का प्राण भी कहा जाता है लेकिन इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और लोगों की उदासीनता के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है। मां गंगा की सफाई और इसे प्रदूषण मुक्त करने को केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन इसके उलट हकीकत देखनी हो तो झूंसी के छतनाग घाट पर चले आइए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे की छतनाग घाट पर धज्जियां उड़ाई जा रही है। लोग मनमाने तरीके से मां गंगा को बुरी तरह प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। माघ, महाकुंभ और कुंभ के दौरान छतनाग घाट तक मेला बसाया जाता है।
हालांकि इस दौरान शवों का अंतिम संस्कार यहां बंद करा दिया जाता है। छतनाग श्मशान घाट पर झूंसी के अलावां जौनपुर, प्रतापगढ़, हंडिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर, बरौत, बादशाहपुर समेत कई शहरों से लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। घाट के किनारे शव को जलाने के लिए लकडिय़ों की भी कई टाल हैं। इसके बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लोगों की भारी संख्या में हुई मौत के दौरान चंद पैसे बचाने के लिए मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। घाट पर मां गंगा की अविरल धारा से महज दो सौ मीटर दूर पर ही तकरीबन एक किलोमीटर की एरिया में सौ से ज्यादा लाशें बेखौफ दफनाई गई हैं। इससे छतनाग गांव समेत आसपास के लोग हतप्रभ हैं। ग्रामीणों ने शवों को दफनाए जाने पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है।