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गंगा तट को बना दिया कब्रिस्तान : झूंसी के छतनाग श्मशान घाट में रेती में दफना दिए सैकड़ों शव 

Sat, 15 May 2021 09:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 15 May 2021 09:51 PM IST
सार

  • चंद पैसे बचाने को झूंसी के छतनाग गंगा घाट को लोगों ने बना दिया है कब्रिस्तान 
  • श्मशान घाट पर गंगा तट के किनारे दफनाई गई हैं सैकड़ों लाशें 
  • आस्था के नाम पर मोक्षदायिनी मां गंगा को लगातार किया जा रहा प्रदूषित 
  • बाढ़ आने पर गंगा तट के किनारे गाड़ी गईं लाशें उतराकर बहती हैं गंगा में 
  • ग्रामीणों ने प्रशासन से लाखों के दफनाने पर रोक लगाए जाने की मांग की 

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Ganges made cemetery: Hundreds of dead bodies buried in sand in Chhatnag crematorium ghat of Jhunsi
prayagraj news : झूंसी के छतनाग घाट पर सैकड़ों की संख्या में दफनाए गए शव। - फोटो : prayagraj

विस्तार

सदियों से लोगों की आस्था के रुप में पूजी जाने वाली मां गंगा का अस्तित्व झूंसी में खतरे में हैं। झूंसी के छतनाग गांव स्थित गंगा तट को लोगों ने कब्रिस्तान बना दिया है। वैसे तो छतनाग घाट को श्मशान घाट के रुप में ज्यादा मान्यता मिली हुई है लेकिन कोरोना संक्रमण में इन दिनों शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचने वाले लोग शव को बालू में दफनाकर मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। छतनाग घाट पर गंगा तट के तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी में सौ से ज्यादा लाशें दफनाई गई हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने प्रशासन से इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है। 

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आदिकाल से मां गंगा हिन्दुओं के लिए आस्था का प्रतीक रही है। मां गंगा को भारतीय संस्कृति का प्राण भी कहा जाता है लेकिन इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और लोगों की उदासीनता के चलते इसका अस्तित्व खतरे में है। मां गंगा की सफाई और इसे प्रदूषण मुक्त करने को केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन इसके  उलट हकीकत देखनी हो तो झूंसी के छतनाग घाट पर चले आइए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे की छतनाग घाट पर धज्जियां उड़ाई जा रही है। लोग मनमाने तरीके से मां गंगा को बुरी तरह प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। माघ, महाकुंभ और कुंभ के दौरान छतनाग घाट तक मेला बसाया जाता है।

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Ganges made cemetery: Hundreds of dead bodies buried in sand in Chhatnag crematorium ghat of Jhunsi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

हालांकि इस दौरान शवों का अंतिम संस्कार यहां बंद करा दिया जाता है। छतनाग श्मशान घाट पर झूंसी के अलावां जौनपुर, प्रतापगढ़, हंडिया, गोपीगंज, ज्ञानपुर, बरौत, बादशाहपुर समेत कई शहरों से लोग शवों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। घाट के किनारे शव को जलाने के लिए लकडिय़ों की भी कई टाल हैं। इसके बावजूद कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लोगों की भारी संख्या में हुई मौत के दौरान चंद पैसे बचाने के लिए मां गंगा को प्रदूषित करने में जुटे हुए हैं। घाट पर मां गंगा की अविरल धारा से महज दो सौ मीटर दूर पर ही तकरीबन एक किलोमीटर की एरिया में सौ से ज्यादा लाशें बेखौफ दफनाई गई हैं। इससे छतनाग गांव समेत आसपास के लोग हतप्रभ हैं। ग्रामीणों ने शवों को दफनाए जाने पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग की है। 

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Ganges made cemetery: Hundreds of dead bodies buried in sand in Chhatnag crematorium ghat of Jhunsi
लाश। - फोटो : अमर उजाला।

मजबूरी में छोड़ रहे हिन्दू रीति रिवाज

छतनाग श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार करने पहुंचे लोगों से जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने बात की तो बताया कि कोरोना संक्रमण काल में काम धंधा सब चौपट है। शव का क्रिया कर्म करने में कम से कम दस से बारह हजार रुपये का खर्च आता है। जो इस वक्त उनके लिए बहुत बड़ी रकम है। इसलिए वे हिन्दू परंपरा को छोड़कर शव को रेती मेें दफनाने के लिए मजबूर हैं। 

बांस-बिस्तर देख कांप उठती है रुह

छतनाग घाट के तकरीबन एक किलोमीटर के दायरे में चिताओं के निशान, बिखरे अंतिम संस्कार के अवशेष को देखकर लोगों का कलेजा कांप जाता है। जिन जगहों पर शवों को गाड़ा गया है, उसी के ठीक बगल में ही बांस और बिस्तर पड़े रहते हैं। इससे आसपास रहने वालों को जीना मुहाल हो रहा है। 

बाढ़ में गाड़ी गई लाशें उतराकर आ जाती हैं ऊपर 

छतनाग घाट के किनारे बालू में गाड़ी गई लाशें बाढ़ के दौरान लोगों के लिए भारी मुसीबत बन जाती हैं। तकरीबन हर साल जुलाई-अगस्त के माह में झूंसी के गंगा तट के किनारे भीषण बाढ़ से लोग घिर जाते हैं। हालत यह रहती है कि आसपास के आश्रम, मठ और घरों में बाढ़ का पानी दाखिल हो जाता है। उसी वक्त गंगा के किनारे गाड़ी गई लाशें भी उतरा जाती हैं। लाशें बहकर आश्रम और लोगों के घर के किनारे जाकर लग जाती हैं। इससे लोगों की मुसीबत बढ़ जाती है। इसी के चलते ग्रमीणों ने प्रशासन से तत्काल शवों के दफनाने पर रो लगाए जाने की मांग की है।
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