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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Drain water is falling into Ganga without purification, how will devotees take a holy dip in Mahakumbh

Mahakumbh : बगैर शोधन ही गंगा में गिर रहा नालों का पानी, महाकुंभ में श्रद्धालु कैसे लगाएंगे पुण्य की डुबकी

Mon, 09 Dec 2024 11:54 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 09 Dec 2024 11:54 AM IST
सार

अमर उजाला की पड़ताल में करोड़ों की लागत से बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की हकीकत पता चली। इसमें झूंसी और छतनाग में करीब दो साल से संचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को 20 दिन पहले बंद कर दिया गया। बताया गया कि महाकुंभ के पहले सड़क निर्माण के दौरान प्लांट के भूमिगत आईएनडी उपकरण कई जगहों पर टूट गए।

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Drain water is falling into Ganga without purification, how will devotees take a holy dip in Mahakumbh
झूंसी में गंगातट के किनारे सीधे गंगा में गिर रहा नाले का प्रदूषित पानी। - फोटो : संवाद।

विस्तार

महाकुंभ से पहले नालों को पूरी तरह से टैप करने के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। आज भी बगैर शोधन के गंगा में दर्जन भर से ज्यादा नालों का पानी गिर रहा है। वहीं, तीन दिन पहले एनजीटी ने भी इस पर चिंता जाहिर की थी। ऐसे में श्रद्धालु कैसे आस्था के मेले में पुण्य की डुबकी लगा पाएंगे। वहीं, अमर उजाला की पड़ताल में करोड़ों की लागत से बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की हकीकत पता चली। इसमें झूंसी और छतनाग में करीब दो साल से संचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को 20 दिन पहले बंद कर दिया गया। बताया गया कि महाकुंभ के पहले सड़क निर्माण के दौरान प्लांट के भूमिगत आईएनडी उपकरण कई जगहों पर टूट गए। जिस वजह से प्लांट का संचालन बंद करना पड़ा।

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महाकुंभ के पहले गंगा के तीन घाटों का जल आचमन लायक नहीं है। झूंसी के दर्जन भर नालों का गंदा पानी बगैर शोधन ही गंगा में गिराया जा रहा है। सैकड़ों कॉलोनियों और दर्जनों गांवों का झागयुक्त पानी भी इसमें शामिल है। ऐसे में गंगा के निर्मलीकरण को लेकर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रयागराज में 84 नालों का पानी बायोरेमेडिएशन प्रक्रिया से होकर गंगा में गिराया जा रहा है। इनमें से 68 नालों का पानी बगैर शोधन ही गंगा में गिर रहा है। वहीं, 16 नाले ही ऐसे हैं जो एसटीपी से शोधित होकर गंगा में गिर रहे हैं।

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झूंसी के एसटीपी प्लांट से गिरता काला पानी। - फोटो : अमर उजाला।

झूंसी में छतनाग इलाके में नमामि गंगे योजना के तहत 61.45 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को तैयार किया है। इस प्लांट से झूंसी के 17 नालों को टेप किया गया है। साइट सुपरवाइजर सत्यम झा और भावेंदु ने बताया कि पिछले 20 दिनों से प्लांट का संचालन बंद है। असल में झूंसी के छतनाग से लेकर नई झूंसी तक गंगातट के किनारे सड़क का निर्माण हो रहा है। इसमें भूमिगत 13 में से नौ एनआईडी उपकरण टूट गए हैं। इन्हें दोबारा से लगाया जा रहा है। जनवरी के पहले हफ्ते में प्लांट को दोबारा चालू कर दिया जाएगा।

नौ एसटीपी का संचालन अडानी ग्रुप के हाथों में

शहर के नौ एसटीपी प्लांटों का संचालन अडानी ग्रुप और मॉनिटरिंग जल निगम कर रहा है। अडानी ग्रुप की ओर से झूंसी के साथ ही नैनी वन, नैनी टू, सलोरी, राजापुर, पोंगहट, नुमायाडाही, फाफामऊ, और कुडरहा में एसटीपी का संचालन किया जा रहा है। साथ ही त्रिवेणी राजापुर में 100 एमएलडी, एचएनवी सलोरी में 42 एमएलडी और जिंदल के 50 एमएलडी के सीवेज प्लांट तैयार किए जा रहे हैं।

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