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प्रमादी संवत के राजा-मंत्री मिलकर करेंगे धनवर्षा

Tue, 24 Mar 2020 11:18 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 24 Mar 2020 11:18 PM IST
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dhanavarsha will be the king minister of pramadi nav samvat
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ बुधवार को प्रमादी नाम नवसंवत्सर का आगमन होगा। लॉक डाउन की वजह से पहली बार लोग नव संवत्सर के स्वागत में न तो संगम तट पर खुशियों का इजहार कर सकेंगे न तो कहीं सामूहिक प्रार्थनाएं ही होंगी। इस प्रमादी नामक नव संवत के राजा बुध एवं मंत्री चंद्रमा होंगे। ज्योतिष गणना के मुताबिक ग्रहों की इस युति से कृषि और व्यापार के क्षेत्र में उन्नति होगी।
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प्रमादी नाम नवसंवत्सर में वर्षा अच्छी होने के योग हैं। सुख एवम धन -धान्य में वृद्धि होगी । बुध का राजा होना यह इस बात का द्योतक है कि वर्ष भर व्यापार की दृष्टि से अच्छा समय रहेगा। निंबार्क पीठाधीश्वर आचार्य विष्णुकांत गोस्वामी चंद्रमा के मंत्री होने की वजह से अच्छी सलाह राजा को मिलती रहेगी और दूध, दही मक्खन की अधिकता के साथ ही अन्नोपज भी अच्छी रहेगी। इस संवत्सर में विवाह लगन 11 दिसंबर तक ही रहेगी। जनवरी, फरवरी, मार्च में कोई भी विवाह लग्न नहीं रहेगी। राजा बुध होने से युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इस वर्ष का स्वामी अश्विनी को माना गया है। इसलिए पुरानी परेशानियों को ठीक करने व समाज में फैली बुराइयों को जड़ से ठीक करने के लिए युवा वर्ग अग्रणी होगा।ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार प्रमादी नव संवत्सर में अभी शुरुआती दौर में कुछ दिन परेशानियां बनी रहेंगी। जबकि परिधावी सुख-शांति का प्रदाता होगा। शनि व गुरु के एक साथ दशमेश, एकादश उत्तम राजयोग में बने रहने से छह मई से आनंद संवत्सर आरंभ होने के साथ ही व्याधियों की पूरी तरह शमन हो जाएगा। नव संवत्सर में मीन लग्न में सूर्य व चंद्रमा हैं। मंगल उच्च के होंगे। कोई ग्रह वक्री नहीं है। धनु के गुरु, केतु दशम स्थान में और राहु चतुर्थ में होंगे। इस तरह सारे ग्रह पांच स्थानों में होने से पंचग्रही योग बनेगा। हंस महापुरुष योग केंद्र में है। प्रमादी संवत के प्रभाव से कृषि के क्षेत्र में विकास हो सकता है। रस से भरपूर पदार्थों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी होगी। आषाढ़ माह में कम और भाद्रपद के महीने में अधिक वर्षा के योग हैं। मंगल के प्रभाव से चना, सरसों, बाजरा के मूल्य बढ़ेंगे। नदी और तालाब जल्दी सूख सकते हैं। बेमौसम और प्रतिकूल वर्षा के कारण कई रोग भी उत्पन्न हो सकते हैं।
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