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सरेआम ठेकेदार को किया अगवा, कार में खींचकर ले गए दबंग

Sun, 01 Apr 2018 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 01 Apr 2018 01:48 AM IST
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Doubling carried on to the entire Controversy, dragged into the car
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
बालसन चौराहे के पास शनिवार को सरेआम कुछ दबंग एक ठेकेदार को अगवा कर ले गए। उन्होंने उसे कार में खींचा और अगवा कर चलते बने। भीड़भाड़ वाले इलाके में इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर दबंग निकल भागे और जार्जटाउन पुलिस सोती रही। महिला ने सूचना दी तब नींद टूटी। इसी दौरान पता चला कि कार ताराचंद छात्रावास की तरफ जाते देखी गई है। पुलिस वहां पहुंची तो ठेकेदार समेत आरोपी मिल गए। पुलिस का कहना है कि मामला लेनदेन के विवाद का है। थाने में देर रात तक दोनों पक्षों में पंचायत चलती रही।
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घटना रात करीब साढ़े आठ बजे की है। फूलपुर का रहने वाला ठेकेदार किसी काम से जार्जटाउन थाना क्षेत्र में बालसन चौराहे के पास आया था। अभी वह एचडीएफसी बैंक के पास स्थित क्लीनिक के सामने ही पहुंचा था कि तभी वहां पहुंचे कुछ युवकों ने उसे रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ठेकेदार कुछ समझ पाता, इससे पहले ही युवकों ने उस पर हमला बोल दिया। वह उसे कार से निकालकर पीटने लगे। साथ ही ईंट-पत्थर मारकर कार का शीशा भी क्षतिग्रस्त कर दिया। सरेआम ठेकेदार पर हमला होते देख वहां राहगीरों में भगदड़ मच गई। उधर ठेकेदार को जमकर पीटने के बाद आरोपी उसे कार में खींचकर भाग निकले। सरेआम अपहरण की खबर पर सनसनी फैल गई।
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इसी दौरान प्रत्यक्षदर्शी महिला नेे सूचना दी तो पुलिस की नींद टूटी। इकसे बाद अगवा ठेकेदार और अपहरणकर्ताओं की तलाश शुरू हुई। वायरलेस पर सूचना गूंजी तो कर्नलगंज पुलिस भी अलर्ट हो गई। इसी दौरान पता चला कि वैगनआर कार इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ताराचंद छात्रावास की ओर जाते देखी गई है। कर्नलगंज पुलिस वहां पहुंची तो ताराचंद छात्रावास के आगे खाली आवास के बाहर कार में अगवा ठेकेदार और आरोपी युवक मिल गए। इसके बाद सूचना पर जार्जटाउन पुलिस पहुंची और पीड़ित व आरोपियों को थाने ले गई। वहां सीओ आलोक मिश्रा भी पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में पता चला कि दोनों पक्षों के बीच ढाई लाख रुपये के लेनदेन का विवाद है। देर रात तक दोनों पक्षों के बीच पंचायत चलती रही। इंस्पेक्टर जार्जटाउन संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि अपहरण की बात गलत है। ठेकेदार और युवकों के बीच रुपयों के लेनेदेन का विवाद है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पूछताछ की जा रही है।
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पुलिस का कहना है कि कार अपहरण का आरोप लगाने वाले ठेकेदार की है। जांच पड़ताल में पता चला कि इस कार पर बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा था। इस संबंध में ठेकेदार से पूछताछ की जा रही है।


इस पूरे प्रकरण में पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। सरेआम अपहरण के बावजूद पुलिस इस घटना को ही नकारती रही। पूछने पर पुलिस इसे लेनदेन का विवाद बताती रही। उधर दोनों पक्षों को थाने लाए जाने के बाद कार्रवाई की बजाय पुलिस समझौते में लगी रही। सवाल यह है कि विवाद लेनदेन का भी था तो पुलिस ने संबंधित पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं की। क्यों पुलिस सरेआम हुई अपहरण की घटना को ही झुठलाती रही। देर रात तक आखिर पुलिस क्यों समझौते की कोशिश में जुटी रही।
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