यूपी : चार विषयों के अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की कैविएट, आदेश के बाद भी नहीं मिली है नियुक्ति
विज्ञापन संख्या-50 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर गणित, गृह विज्ञान, संस्कृत और शारीरिक शिक्षा के परिणाम के विवाद का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने भी माना था कि इन विषयों के मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई है, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर आयोग ने इन चारों विषयों का संशोधित परिणाम जारी कर दिया था।
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प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयाें में विज्ञापन संख्या-50 के तहत संशोधित परिणाम में चयनित 18 अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। इन अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नहीं मिली है। ऐसे में उच्च शिक्षा निदेशालय हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।
विज्ञापन संख्या-50 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर गणित, गृह विज्ञान, संस्कृत और शारीरिक शिक्षा के परिणाम के विवाद का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने भी माना था कि इन विषयों के मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई है, जिसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर आयोग ने इन चारों विषयों का संशोधित परिणाम जारी कर दिया था।
संशोधित परिणाम में इन चारों विषयों में 18 नए अभ्यर्थियों को चयनित घोषित किया गया। इनकी जगह पूर्व में चयनित 18 अभ्यर्थियों को बाहर किया जाना था, लेकिन वे छह माह पहले ही नियुक्ति पा चुके थे। नौकरी पर संकट मंडराता देख पूर्व में चयनित अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंच गए। हाईकोर्ट ने इन अभ्यर्थियों राहत देते हुए काम करते रहने का आदेश दिया।
जब संशोधित परिणाम में चयनित अभ्यर्थी भी नियुक्ति के लिए न्यायालय की शरण में गए तो कोर्ट ने आयोग और शासन से पूछा कि क्या इनके लिए सीट खाली है। स्टैंडिंग काउंसिल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कि कॉलेजों में पद खाली हैं। न्यायालय ने रिक्त पदों पर इन्हें समायोजित करने का आदेश दिया। नियुक्ति की प्रक्रिया उच्च शिक्षा निदेशालय पूरी करता है।
निदेशालय की ओर से कहा गया कि जितने पदों का विज्ञापन हुआ था, उतने पदों पर अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा चुकी है। विज्ञापित पदों के अलावा बिना विज्ञापन के अन्य पदों पर नियुक्ति देने का कोई प्रावधान नहीं है। उच्च शिक्षा निदेशालय इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है और इसके लिए शासन से अभिमत मांगा गया है। इसी वजह से संशोधित परिणाम में चयनित 18 अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि निदेशालय की ओर से याचिका दाखिल होने पर अभ्यर्थियों को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिल सके।