हाईकोर्ट : वन विभाग के कैजुअल श्रमिकों को बड़ी राहत, सात हजार मानदेय पाने वालों को मिलेगा 18 हजार रुपये मानदेय
कोर्ट ने कहा जिन कैजुअल श्रमिकों को सात हजार रुपये मानदेय नहीं दिया जा रहा है, उनके विस्तृत ब्योरे के साथ जवाब दाखिल करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने विजय कुमार श्रीवास्तव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट के निर्देश पर गोरखपुर के जिला वन अधिकारी का जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख मुख्य वन संरक्षक को विभाग में कार्यरत कैजुअल श्रमिकों जिन्हें सात हजार रुपये मानदेय मिल रहा था। 18 हजार रुपये मानदेय का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि तीन हफ्ते में वित्त विभाग से परामर्श कर उसके अगले दो हफ्ते में बकाया सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है। अन्यथा, प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ऐसा न कर पाने का कारण स्पष्ट करते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें। इसका पालन न करने पर कोर्ट दोनों अधिकारियों को तलब करेगी।
कोर्ट ने कहा जिन कैजुअल श्रमिकों को सात हजार रुपये मानदेय नहीं दिया जा रहा है, उनके विस्तृत ब्योरे के साथ जवाब दाखिल करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने विजय कुमार श्रीवास्तव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट के निर्देश पर गोरखपुर के जिला वन अधिकारी का जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। जिसमें 27 जुलाई 23 की बैठक का एजेंडा दाखिल किया गया है। तय किया गया कि नियमित हुए श्रमिकों को काम दिया जायेगा। कोर्ट आदेश पर विचार कर पालन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई।
वित्त विभाग से अनुमोदन मांगा गया है। छह अगस्त 23 के आदेश से प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ने विवाद तय करने को पांच सदस्यीय कमेटी गठित की। अब छह सदस्यीय दूसरी कमेटी बनाई गई है। साथ ही तीन याचियों विजय कुमार श्रीवास्तव, गुलाब यादव व राधेश्याम यादव के बैंक खाते में 48 घंटे में भुगतान भेजने का आदेश दिया गया है, जो सात हजार रुपये मानदेय नहीं पा रहे कमेटी उनका पता करेगी।
याची अधिवक्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने सभा शंकर दूबे केस में कहा है कि सात हजार मानदेय पाने वाले समान लाभ पाने का हकदार माना है। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने आपत्ति की। कोर्ट ने कहा कि सात हजार मानदेय पाने वालों को 18 हजार देना कमेटी ने तय किया है। वे उसके हकदार होंगे। वन विभाग वित्त विभाग से परामर्श कर भुगतान करें।