बांके बिहारी कॉरिडोर मामला: हाईकोर्ट सरकार और सेवायतों के बीच विवाद निपटाने के लिए नियुक्त करेगी मध्यस्थ
इलाहाबाद हाईकोर्ट बांके बिहारी मंदिर के आसपास कॉरिडोर बनाए जाने के मामले में पक्षकारों के बीच उठे विवादों को सुलक्षाने के लिए मध्यस्थ की नियुक्त करेगी। कोर्ट ने इसके लिए अपर महाधिवक्ता से मध्यस्थ के नाम का सुझाव मांगा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट बांके बिहारी मंदिर के आसपास कॉरिडोर बनाए जाने के मामले में पक्षकारों के बीच उठे विवादों को सुलक्षाने के लिए मध्यस्थ की नियुक्त करेगी। कोर्ट ने इसके लिए अपर महाधिवक्ता से मध्यस्थ के नाम का सुझाव मांगा है। साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि यूपी सरकार मध्यस्थ के लिए जिस नाम को प्रस्तावित करे। वह राष्टï्रीय स्तर और अनुभव वाला होना चाहिए। कोर्ट अब इस मामले में 26 अप्रैल को सुनवाई करेगी।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने अनंत शर्मा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याची की ओर से बांके बिहारी मंदिर में बढ़ रही भीड़ को देखते हुए उसकेउपबंध किए जाने की मांग की गई है। जिस पर सरकार ने कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है। लेकिन, मंदिर के सेवायत और आसपास के दुकानदारों ने कॉरिडोर बनाने के मामले में कई आपत्तियां उठाईं हैं।
शुक्रवार को सुनवाई केदौरान सेवायतों और दुकानदारों की ओर से कहा गया यूपी सरकार कॉरिडोर निर्माण में उनकी सुन नहीं रही है। अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने कहा कि कॉरिडोर बनाने में यूपी सरकार जो पैसा खर्च करेगी वह मंदिर को दान में चढऩे वाले चढ़ावे से करेगी, लेकिन इसके लिए वह सेवायतों से कोई बात नहीं कर रही है। इसके अलावा दुकानादारों की ओर तर्क दिया गया कि कॉरिडोर निर्माण में कुंज गली और मंदिर परिसर को क्षति न पहुंचाई जाए।
मध्यस्थ नियुक्त करने पर सभी ने जताई सहमति
मंदिर के स्वरूप में कोई छेड़छाड़ न किया जाए। इस पर कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल से पूछा कि कॉरिडोर का निर्माण कार्य मंदिर के अंदर भी होगा या बाहर ही कराया जाएगा। अपर महाधिवक्ता ने बताया कि बाहर ही निर्माण कार्य होंगे। इस पर कोर्ट ने कॉरिडोर निर्माण का प्रस्तावित लेआउट मांगा। बताया गया कि अभी तैयार नहीं है। इस पर कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मध्यस्थ नियुक्त करने को कहा। सभी पक्षों ने इस पर सहमति जताई। कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता से मध्यस्थ के नाम का सुझाव मांगा है। अब अगली सुनवाई पर कोर्ट मध्यस्थ को नियुक्त कर सकती है।